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एईएस से लड़ने के लिए जिले भर में चौपाल का आयोजन

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सिविल सर्जन ने कहा कि एईएस बचाव के लिए चलाया जा रहा जागरूकता अभियान

मोतिहारी: जिले में एईएस व जेई की रोकथाम एवं जागरूकता को लेकर शुक्रवार को चकिया, मेहसी, मधुबन में चौपाल का आयोजन किया गया। इस मौके पर पोस्टर-पंपलेट बांटकर जागरूक किया गया। सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिले के सभी 27 प्रखंडों में कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिससे जिले में मस्तिष्क, चमकी बुखार जैसी गंभीर रोगों का खात्मा हो सके। बच्चे सुरक्षित हो सकें । मेहसी के ब्लॉक मैनेजर ने बताया कि प्रखंड के महादलित टोला अमवा, बथनाहा, सरायबनवारी सहित कई गाँवों में लगातार चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बीसीएम धर्मेन्द्र कुमार, केयर बीएम कुन्दन कुमार, रौशन कुमार, बीएमसी सुजीत कुमार, जीएनएम सानिया राज, एएनएम आशा देवी, निशि कुमारी, आशा फैसिलेटर ने लोगों से मिलकर एईएस की जानकारी एवं उससे बचने के उपाय बताए।

गर्मी में बढ़ जाती है चमकी बुखार की संभावना
मधुबन बीडीओ कुमारी सविता ने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ ही चमकी बुखार की संभावना बढ़ जाती है। इसकी रोकथाम व बचाव के लिए लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। इसके लिए माइक्रो प्लान के तहत पंचायतों में चौपाल लगाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही महादलित टोला में विशेष अभियान चलाकर जागरूकता पैदा करने पर बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में मधुबन में 22 बच्चे, जबकि 2020 में 9 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हुए थे।

बच्चों को संतुलित भोजन देना जरूरी

डॉ चन्दन कुमार, बीएचएम शशिकांत श्रीवास्तव, एईएस नोडल डॉ तेजनारायण चौधरी ने बताया कि बदलते मौसम में बच्चें सर्दी, खांसी, बुखार, दस्त, डायरिया, उल्टी जैसे रोगों से संक्रमित हो सकते हैं। बच्चों को इन सभी परेशानी से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के लिए अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। बच्चों को संतुलित भोजन देना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चे को माँ का दूध पिलाना चाहिए। माँ के दूध से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युन सिस्टम) मजबूत रहती है।

 

अप्रैल से जुलाई तक मस्तिष्क ज्वर की रहती है संभावना

सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर सिंह ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में मस्तिष्क ज्वर होने की संभावना बनी रहती है। मस्तिष्क ज्वर की स्थिति में माता-पिता बच्चों की समस्या को पहचान नहीं पाते, जिसके कारण इसके इलाज में ही काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी है। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि लोग चमकी बुखार मस्तिष्क ज्वर को सही समय पर जान सकें और समय पर इलाज कराकर सुरक्षित रह सकें ।

 

एईएस के लक्षण
– बच्चों को बहुत ही तेज बुखार होता है।
-बुखार के साथ चमकी आना शुरू होता है।
– मुंह से भी झाग आता है।
– भ्रम की स्थिति होना ।
– पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मार देना।
– हाथ पैर का अकड़ना ।
– बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक संतुलन का ठीक नहीं रहना ।
– बेहोश होने जैसी स्थिति भी हो जाती है।

कोरोना काल में इन बातों का पालन करें

एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।