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शीबू की साइकिल की घंटी से दूर भाग रहा कोरोना

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चिकित्सक की तरह कोरोना संक्रमण के प्रति समुदाय को जागरूक कर रहा एक नाई

– शीबू नाई के छोटे से जागरूकता के प्रयास ने समुदाय में लाया बड़ा बदलाव

सीतामढ़ी : सुरसंड प्रखंड के बाजार वाले मुहल्ले में जब भी लोग अपने दरवाजे पर साइकिल की घंटी की आवाज सुनते हैं तो दौरे चले आते हैं। साइकिल पर छोटा-सा बैग टांगे और मास्क लगाए एक युवक मुस्करा कर दरवाजे पर खड़ा हो जाता है। सामने वाले व्यक्ति का पहले हाथ सैनिटाइज कराता है, फिर बोलता है किसी बर्तन में थोड़ा पानी गर्म करके ले आइए। फिर उसमें डेटॉल डालता है। अपने बैग से सामान निकाल कर उसे उसमें डालकर डिसइन्फेक्ट(Disinfect ) करता है। आप सोच रहे होंगे कि इतनी प्रक्रिया कर रहा है तो निश्चित रूप से कोई चिकित्सक ही होगा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि चिकित्सक की भूमिका में यह एक नाई है, जिसने कोरोना के प्रति अपने जागरूक व्यवहार से लोगों में भी जागरूकता ला दी है। शीबू नाई के छोटे से जागरूकता के प्रयास ने समुदाय में बड़ा बदलाव ला दिया है। मुहल्ले के अशरफ अंसारी, अंजार, सैफ, जिलानी सहित कई लोगों का कहना है कि शीबू की साइकिल की घंटी से कोरोना दूर भाग रहा है। लोगों का कहना है कि कोरोना काल में वे घर बैठे सुरक्षित बाल तो कटवा ही लेते हैं, शीबू की कोरोना के प्रति जागरूकता से लोग भी जागरूक हुए हैं। देखा-देखी खुद भी प्रेरित होकर मास्क पहनने लगे हैं।

विदेश से लौटे तो गांव में शुरू कर दिया काम :

शीबू ने बताया लॉकडाउन में लोगों को बाल-दाढ़ी कटवाने में बड़ी दिक्कत होती थी। कोरोना संक्रमण को लेकर अलग डर बना हुआ था। दुबई से लौट कर घर बैठे थे। काम बंद था तो घर में रखी साइकिल को ही चलती-फिरती दुकान बना ली। वह बताते हैं कि लॉकडाउन में सबसे चुनौतीपूर्ण काम था लोगों के मन में भरोसा पैदा करना और अपने जागरूक व्यवहार से उनमें कोरोना के प्रति जागरूकता पैदा करना। काम शुरू किया तो न केवल आमदनी बढ़ी, बल्कि लोगों को जागरूक करने के मकसद में भी कामयाबी मिली। शीबू का कहना है कि समुदाय में किसी भी पेशे से जुड़े लोग अपने काम के जरिए भी कोरोना संक्रमण के खतरे से लोगों को बचा सकते हैं। अपने जागरूक व्यवहार से लोगों को प्रेरित कर सकते हैं। उनका कहना है कि छोटे-छोटे स्तरों पर किया गया प्रयास ही समाज में बड़े बदलाव की बुनियाद रखता है।

फोन कर के लोग बुलाते हैं घर पर :
शीबू कहते हैं लॉकडाउन से लेकर अब तक अच्छी कमाई हो रही है। लोगों ने मेरा मोबाइल नंबर सेव कर लिया है। जो भी कॉल करता है, तुरंत साइकिल से उसके दरवाजे पर हाजिर हो जाते हैं। शीबू बताते हैं कि कभी-कभी लोग कहते हैं कि ऐसे ही बाल-दाढ़ी बना दीजिए, क्यों इतनी प्रक्रिया कर रहे हैं। तब वह समझाते भी हैं कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। जितनी सतर्कता बरतेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे। शीबू का कहना है कि जब वे लोगों को ऐसा बोलते हैं तो वे उनकी बात को गंभीरता से लेते हैं। उनका कहना है कि जब कहीं भी उनके काम करने के तरीके की चर्चा होती है तो इस बहाने कोरोना के प्रति सतर्कता बरतने की बात भी छिड़ती है। शीबू इसे अपने छोटे-से प्रयास की बड़ी सफलता मानते हैं।
रिपोर्ट : अमित कुमार