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छोटा परिवार-सुखी परिवार पर जोर

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मातृ शिशु अस्पताल में परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने की सलाह दी जा रही

शिवहर:  जिले में परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। हर स्तर पर जागरूकता फैला कर महिलाओं और पुरुषों को परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मातृ-शिशु अस्पताल में भी छोटा परिवार सुखी परिवार का संदेश दिया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं को प्रसव कक्ष में छोटा परिवार सीमित परिवार के बारे में बताया जाता-
मातृ-शिशु अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव कक्ष में छोटा परिवार सीमित परिवार के बारे में बताया जाता है। मातृ शिशु अस्पताल की लेबर इंचार्ज अनुराधा कुमारी ने बताया कि यहां परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की सुविधा जैसे छाया, अंतरा एवं कंडोम का लाभ उठाने की सलाह दी जाती है। वहीं जिन दंपति ने अपना परिवार पूरा कर लिया है, उन्हें परिवार नियोजन के स्थायी साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आयी महिलाओं को बच्चों में कम से कम 3 साल के अंतराल के लिए परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए कहा जाता है।

स्थायी व अस्थायी साधन हैं उपलब्ध
अनुराधा कुमारी ने बताया की मातृ-शिशु अस्पताल में परिवार नियोजन के लिए जरूरी सभी स्थायी व अस्थायी दोनों ही साधन उपलब्ध हैं। जो महिला स्थायी साधन का इस्तेमाल करना चाहती जैसे कि बंध्याकरण इत्यादि उन्हें अस्पताल में भेज दिया जाता है, जबकि अस्थायी साधन के रूप में अंतरा इंजेक्शन, कॉपर-टी, छाया, माला-एन, इजी पिल्स, कंडोम आदि की सुविधा इन्हें तुरंत दी जाती है। उसके इस्तेमाल और सावधानियों की जानकारी भी दी जाती है।

महिलाओं को जानकारी देना कारगर साबित हो रहा

अनुराधा कुमारी ने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण में परिवार नियोजन की बहुत अधिक भूमिका है। यहां ‘अंतरा’ इंजेक्शन और ‘छाया’ गोली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए यह इंजेक्शन तीन माह में एक बार लगाया जाता है, वहीं जो महिलाएं इंजेक्शन लगवाने से डरती हैं उनके लिए छाया गोली है। ये हफ्ते में दो बार दी जाती है। सही जानकारी नहीं होने के कारण बहुत सारी महिलाएं चाह कर भी परिवार नियोजन के साधन का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। इस दिशा में महिलाओं को परिवार नियोजन साधनों की जानकारी देना काफी कारगर साबित हो रहा है।

कॉपर-टी बेहतर विकल्प
पोस्ट पार्टम इंट्रा यूटाराइन कांट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी)। यह उस गर्भ निरोधक विधि का नाम है जिसके जरिए बच्चों में सुरक्षित अंतर रखने में मदद मिलती है। प्रसव के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली यह विधि सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है। प्रसव के बाद अस्पताल से छ़ुट्टी मिलने से पहले ही यह डिवाइस (कॉपर टी) लगवाई जा सकती है। एक बार लगवाने के बाद इसका असर पांच से दस वर्षों तक रहता है। यह बच्चों में अंतर रखने की लंबी अवधि की एक विधि है।

रिपोर्ट : अमित कुमार