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गया : कृषि मंत्री ने दुग्ध युनियन के प्रबंध निदेशकों के साथ की वीडियो कांफ्रेंसिंग.. डेयरी किसानों को समय से भुगतान का दिया निर्देश

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गया : डाॅ॰ प्रेम कुमार, मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार ने समाहरणालय गया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी 09 मिल्क यूनियन के प्रबन्ध निदेशकों से कोरोना वैश्विक महामारी में जारी लाॅक डाउन की स्थिति में राज्य में मिल्क कलेक्षन, दूध एवं दुग्ध पदार्थों की बिक्री की स्थिति, मिल्क प्रोसेसिंग प्लान्ट को चलाने के लिये आवष्यक केमिकलस, ईधन, पैकेजिंग मटेरियल की स्थिति, डेयरी किसानों को दूध के पैसे का भुगतान, किसानों के पास पशुचारा की उपलब्धता आदि की समीक्षा हेतु बैठक की गई है।इस बैठक में पटना से सचिव, पशु, डेयरी एवं मत्स्यसंसाधन विभाग,बिहार डा॰ एन॰ सरवन कुमार एवं काम्फेड की प्रबन्ध निदेषक श्रीमती षिखा श्रीवास्तव भी सम्मिलित हुये।
सचिव महोदय ने बताया कि राज्य में इस समय 19 लाख 31 हजार लीटर दूध का कलेक्शन हो रहा है जो 24 मार्च को लाॅक डाउन लागू होने से पहले 19 लाख 16 हजार लीटर होता था।करीब 15000 लीटर दूध का कलेक्षन बढ़ गया है।जबकि इस अवधि में भोजपुर एवं समस्तीपुर मिल्क यूनियन में कलेक्षन घटा है। उन्होने बताया कि मिठाई की दुकानों के बन्द होने,चौक चैराहों एवं सार्वजनिक स्थानों पर चाय आदि की दुकानें बन्द रहने के कारण दुग्ध संघों से जुड़े किसान अपना पूरा दूध मिल्क यूनियनों को उपलब्ध करा रहें हैं। उन्होने बताया कि राज्य में 9 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग हो रही है एवं शेष करीब 10 लाख लीटर दूध से दुग्ध उत्पाद एवं दुग्ध पाउडर बनाये जा रहे हैं। सभी मिल्क यूनियनों ने बताया कि दूध की बिक्री घटी हुई है। सरकार के द्वारा दूध की बिक्री का समय बढ़ाये जाने से बिक्री में थोड़ा सुधार हुआ है परन्तु लाॅक डाउन से पहले जितना दूध नहीं बिक रहा है। उन्होने सभी मिल्क यूनियनों से कहा कि ऐसे किसान जो मिल्क यूनियन से जुड़े हुये हैं और अपना दूध यूनियन को देते है उनसे दूध कलेक्षन नियमित रुप से करते रहें।
कई मिल्क यूनियनों ने कहा कि वे डेयरी किसानों को उनके दूध का भुगतान प्रत्येक 10 दिनों पर कर देते हैं। 31 मार्च तक भुगतान कर दिया गया है परन्तु 01 से 10 अप्रैल की अवधि में किये गये मिल्क कलेक्षन का भुगतान करने के बाद प्लान्ट चलाने के लिये आवश्यक पैसों की कमी होगी और लाॅक डाउन लम्बा खिचने पर बिना विषेष सहायता या कर्ज के किसानों को समय पर भुगतान करने का संकट खड़ा हो जायेगा।मंत्री ने कहा कि सरकार एन॰सी॰डी॰सी॰ से एवं राज्य योजना से संकट की इस घड़ी में डेयरी किसानों को मदद करने के लिये 320 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने के प्रस्ताव पर कार्य कर रही है।किसी भी स्थिति में डेयरी किसानों को दूध का मूल्य समय पर भुगतान किया जाने का निर्देश। इस समय किसानों को अतिरिक्त सहायता दिये जाने का प्रयास किया जाय। पूर्व में सूखा एवं बाढ़ के समय में दी गई कैटल फीड सब्सिडी को भी लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। सुधा के दूध के अतिरिक्त अन्य उत्पादों पर भी ध्यान दें लाक डाउन की स्थिति में सुधा की मिठाईयों, दही, पनीर एवं आईसक्रीम की उपलब्धता लोंगों के घरों के पास तक हो यह सुनिष्चित किया जाय। आॅनलाईन बिक्री एवं होम डिलीवरी सिस्टम को मजबूत किया जाय एवं पार्लरों के अतिरिक्त सभी बिक्री केन्द्रो से भी मिठाई,दही, पनीर और आईसक्रीम की बिक्री की व्यवस्था बनायी जाय और मिल्क यूनियनें अपने स्तर से एन॰डी॰डी॰बी॰ से कर्ज लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ायें सरकार उनको कर्ज दिलवाने में सहायता करेगी एवं मिल्क पार्लरों एवं विक्रेताओं के व्हाट्सऐप ग्रुप के साथ ही। अलग-अलग दुग्ध समितियों के किसानों के भी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उनकी समस्याओं की जानकारी लें और उनको आवष्यक सलाह, सुझाव तथा सहयोग दिया जाय एवं मगध मिल्क यूनियन के प्रबन्ध निदेशक अवधेश कुमार कर्ण ने बताया कि लाॅक डाउन की स्थिति में मगध डेयरी मे इस समय 55000 लीटर दूध का कलेक्शन हो रहा है एवं 35000 लीटर की बिक्री है। शेष 20000 लीटर दूध का पाउडर बनाने के लिये बिहार शरीफ भेजा जाता है। सुधा के कैटल फीड की बिक्री 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है।गया में पनीर और लस्सी की बिक्री बढ़ गई है। लगभग 3000 लीटर दूध की होम डिलीवरी की जा रही है।यूनियन के अधीन 846 आउटलेट्स और 40 होल डे पार्लरों से सुधा दूध और दूध से निर्मित उत्पादों की बिक्री हो रही है।

                               रिपोर्ट : धीरज गुप्ता