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नीले डिब्बे में ‘दो बूंद जिंदगी की’ लेकर जाने की तैयारी में जुटे स्वास्थ्य कर्मी

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जिले में 11 अक्टूबर से होगी पोलियो राउंड की शुरुआत

– 1474 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम जाएगी जिले के 5 लाख 75 हजार घरों में

सीतामढ़ी: जिले में नौनिहालों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ यानि पोलियो की खुराक पिलाने की पूरी तैयारी अंतिम चरण में है। वैक्सीनेटर और सुपरवाइजर को हर प्रखंड में इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पोलियो वैक्सीन के डिब्बे की साफ-सफाई की जा चुकी है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. ए.के झा ने बताया, 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले पोलियो अभियान के लिए सारी तैयारियां कर ली गई हैं। बुधवार को टास्क फोर्स की बैठक में अभियान की सफलता को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। डॉ. झा ने बताया, कोरोना काल में पोलियो राउंड को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। मास्क की अनिवार्यता और शारीरिक दूरी का पालन हर किसी के लिए जरूरी होगा।

छह लाख दो हजार बच्चों को पिलानी है खुराक :
डॉ. झा ने बताया छह लाख दो हजार बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए माइक्रोप्लान(Microplan) तैयार है। उनके द्वारा तैयारियों का गहन पर्यवेक्षण किया जा रहा है। जिले में पोलियो राउंड पांच दिनों तक चलेगा। इसके लिए 1474 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को दायत्वि सौंपा गया है। स्वास्थ्य कर्मियों की टीम की देख रेख के लिए 478 सुपरवाइजर को लगाया गया है। पल्स पोलियो(Pulse Polio) अभियान को प्रचार-प्रचार के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

हर बार बच्चों को पिलाई जाए पोलियो की दवा :
डॉ. एके झा के मुताबिक हर बार और एक साथ पोलियो की खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र के 05 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों में इस बीमारी से लडने की एक साथ क्षमता बढती है, और इससे पोलियो विषाणु को किसी भी बच्चे के शरीर में पनपने की जगह नहीं मिलेगी, जिससे पोलियो का खात्मा हो जायेगा। यह खुराक नवजात शिशु को भी पिलानी जरूरी है। निश्चिंत होकर अपने नवजात शिशु को पोलियो की खुराक दिलाएं, क्योंकि इससे किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। यह बच्चों के लिए अमृत से कम नहीं है।

नवजात शिशुओं को पोलियो की खुराक पिलाने पर विशेष बल :
डॉ. झा ने बताया, नवजात शिशुओं को पोलियो की खुराक पिलाने पर विशेष बल दिया जाएगा। मुख्य ट्रांजिट स्थलों- जैसे बस स्टैंड एवं चौक चौराहों से गुजरने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। घर-घर जाकर आशा, आंगनबाडी सेविका और जीविका दीदी अभियान को लेकर लोगों को जागरुक करेंगी। जो लोग बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं पिलवाते हैं, उन्हें बताएंगी कि यह दो बूंद जिंदगी की कैसे उनके बच्चों के लिए बहुत जरूरी है।

जन जागरुकता से सफल होगी मुहिम :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके झा ने बताया, कार्यक्रम को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों का योगदान भी अहम होगा। सुदूर क्षेत्रों में, जहां पल्स पोलियो अभियान को लेकर लोगो में जागरूकता नहीं है, वहां पर ज्यादा फोकस रहेगा। जहां पर लोग पल्स पोलियो की खुराक अपने बच्चों को नहीं दिलवाते हैं, ऐसे स्थलों और पंचायतों को चिन्हित कर जनजागरूकता की आवश्यकता है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा है कि वे अपने-अपने पंचायत में पल्स पोलियो अभियान में प्रमुख भागीदारी निभाएंगे। डॉ. झा ने बताया, पोलियो उन्मूलन जनजागरुकता के कारण ही संभव हो पाया है। भविष्य में इसकी संभावनाओं को समाप्त करने के लिए यह अभियान कारगर साबित होगा।

कोविड अनुरूप आचरण का रखा जाएगा ख्याल
डॉ. एकेझा ने बताया बच्चों को दवाई पिलाने के दौरान कोविड अनुरूप आचरण का ख्याल रखा जाएगा। बचाव से संबंधित उपायों का पालन करते हुए कर्मी दवा पिलाऐंगे और खुद के साथ-साथ दूसरों का भी कोविड-19 से सुरक्षा का ख्याल रखेंगे। इसको लेकर विभागीय पदाधिकारियों द्वारा सभी कर्मियों को आवश्यक निर्देश का पालन करना होगा ताकि कोविड-19 के संक्रमण से सुरक्षित रह सकें ।

रिपोर्ट : अमित कुमार