Wed. Apr 14th, 2021

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कैमूर : लाकडाउन से बेवस मजदूरों को नहीं रोक पा रहा जज्बा.. दिव्यांगता को पछाड़ पहुंच रहे अपनी मंजिल

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कैमूर : सरकार लाख दावे कर ले लेकिन प्रवासी मजदूरो को नही मिल रहा है मदद। अगर हौसला बुलंद है तो इंसान मंजिल तक पहुंच ही जाता है। आज एक ऐसी कहानी दिव्यांग और अपाहिज के सामने आ रही है जो दिव्यांग पिता-पुत्र दिल्ली के आनंद विहार में बरसों से घूम घूम कर मांग कर खाते पीते थे, लेकिन लॉक डाउन के वजह से दाने दाने के लिए मोहताज हो गये। सरकार उनके लिए कोई सुविधा नहीं दे पाई, कोसिस तो बहुत किया लेकिन उनके पास सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिल पाया। एक महीना गुजर जाने के बाद जब उनका पेट भरना बंद हो गया तो उसने हौसला बनाया कि वह अपने घर बिहार चले जाए। दिव्यांग साइकिल पर बैठा और पुत्र साइकिल को उठाते हुए 8 दिन की सफर दिल्ली से बिहार युपी बार्डर तक तय कर बिहार की सीमा में प्रवेश किया। जब बिहार की सीमा में प्रवेश किया तो उसके चेहरे पर खुसी नजर आया।
दिव्यांग ने बताया बहुत परेशानी झेलना पड़ा है , 8 दिन किसी तरह हम लोग चलते हुवे यहाँ पहुंचे हैं । रास्ते मे मांगते खाते बॉर्डर पहुंचे हैं अब लग रहा है कि हम लोग अपने घर पहुंच जाएंगे, फिर दोबारा दिल्ली नहीं जाएंगे।

दुसरी तरह एक अपाहिज व्यक्ति जो बिहार के शाहपुर का रहने वाला है नासिक में कई सालों से साड़ी मिल मे काम करता था लॉक डाउन हुआ तो उसे खाने के लिये कुछ नहीं मिला, उसका एक साथी था जो उसे अपाहिज होने के बावजूद भी साइकिल से उत्तर प्रदेश तक ला दिया और उत्तर प्रदेश के बाद उसे कोई नजर नहीं आया व्यवस्था सरकार का तो हौसला बुलंद करके खुद ही अपाहिज होने के बावजूद भी धीमे-धीमे चल चलकर बिहार की सीमा में प्रवेश कर गया । प्रवेश करते ही उसका उत्साह बढ़ा और फिर कहा कि कभी अब हम बाहर कमाने नहीं जाएंगे, क्योंकि जो दिक्कतें हमें झेलनी थी हमने झेल ली। अपने अपने इलाके गांव में रहकर काम करेंगे ।

सरकार लाख दावा कर ले लेकिन सरकारी दावा गरीब और बेवस मजबूर लोगों के पास उनकी सुविधाएं नहीं पहुंचा रही। इस कस्ट की घड़ी में सिर्फ और सिर्फ उनकी हिम्मत और उनका साथ भगवान भरोसे है।

रिपोर्ट : सोनू कुमार सिंह