Thu. May 13th, 2021

Real4news

Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी – Real4news.com

मोतिहारी : लोगों की जागरुकता से हार रहा चमकी बुखार

2 min read

– जिला से लेकर टोला-मुहल्ला तक लोगों में फैलाई जा रही जागरुकता आ रही काम

– आशा, एएनएम, सेविका और जीविका दीदियों की प्रयास ला रही रंग

मोतिहारी 9 जुलाई : चमकी बुखार (Fever) से ठीक (Thik) हो रहे बच्चों के आंकड़े सरकार के चौतरफा प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं। श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (Memorial College Hospital) की 7 जुलाई 2020 की रिपोर्ट (Report) के अनुसार कुल 50 बच्चे अब तक एईएस के लक्षण वाले एडमिट हुए जिसमें 6 बच्चों की मौत (Death) हुई । जबकि 43 को इलाज के बाद ठीक कर के घर भेजा जा चुका है। यह रिकवरी रेट काफी उत्साहवर्धक है। लोगों में जागरुकता के अलावा समय रहते सुविधाओं से लैस सरकारी अस्पतालों में बच्चों के इलाज से यह बड़ा बदलाव आया है। बानगी के तौर पर बलुहा (ढाका) गांव के एक मजदूर पिता की तत्परता और जागरूकता को ले सकते हैं, जिसने
अपनी छह माह की बिटिया को चमकी जैसी जानलेवा बीमारी के मुंह से बाहर निकल लिया। आज चंचल की मासूम चंचलता पूरे घर के चेहरे पर मुस्कान बिखेरे हुई है। खासकर पिता परीलाल राम जब काम से थके-हारे घर लौटते हैं तो बच्ची की मुस्कान देखकर सारी थकान भूल बैठते हैं और उसके साथ खेलने लगते हैं।

केस स्टडी :

चमकी बुखार से ठीक हुई बच्ची का यह मामला ढाका प्रखंड के बलुहा गांव का है। 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे का वक्त था। छह महीने की चंचल की तबियत उस दिन ठीक नहीं थी। सुबह से ही पेट-मुंह चलने लगा। पिता परीलाल ने पहले बच्ची को डायरिया की दवा लाकर दी। दवा से सुधार नहीं हो रहा था। दूसरे दिन चमकी बुखार का लक्षण नजर आते ही परीलाल बच्ची को लेकर नौ बजे रात में ढाका सरकारी अस्पताल भागे। वहां जरूरी उपचार के बाद बच्ची को मोतिहारी रेफर कर दिया गया। परीलाल कहते हैं चार दिन मोतिहारी सदर अस्पताल में भी बच्ची का इलाज चला। हालत में सुधार नहीं होता देख वहां से बच्ची को एसकेएमसी अस्पताल रेफर कर दिया गया। दो सप्ताह के इलाज के बाद बच्ची ठीक हुई। 11 मई को चंचल के चेहरे पर वही चंचल मुस्कान लौट आई।

रंग ला रहा सरकार का चौतरफा प्रयास :

प्रभावित जिलों में ऊपरी स्तर पर जिलाधिकारी से लेकर सबसे निचले स्तर पर टोले में विकास मित्र तक की सक्रिय भूमिका आज एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) को पछाड़ने में कारगर सिद्ध हो रही है। पंचायतों में जिस युद्ध स्तर पर आशा, एएनएम, सेविका/सहायिका और जीविका दीदियों ने घर-घर जाकर जागरुकता की मशाल जलाई है, वह प्रयास अब लोगों के घरों का चिराग नहीं बुझने देते। बच्चे में जरा-सा भी ऐसा लक्षण नजर आते ही लोग तुरंत सरकारी अस्पताल का रुख करते हैं। परीलाल बताते हैं कि वह मेहनत-मजदूरी करते हैं। भले ही आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है, लेकिन बच्ची का पूरा ख्याल रखते हैं। जागरूकता से ही इस बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकता है।

रिपोर्ट : अमित कुमार