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मोतिहारी : एईएस के खतरे से निपटने के लिए विभाग है सर्तक.. ईलाज पर एकदिवसीय प्रशिक्षण हुआ आयोजित

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-एईएस के इलाज पर एकदिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

मोतिहारी 17 जून : एईएस के खतरे से नौनिहलों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य (health) विभाग पूरी तरह सजग है। जिन इलाकों में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं, वहां जागरुकता, प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित अन्य उपायों पर सरकार की पहल जारी है। इसी क्रम में बुधवार को
चकिया अनुमंडल अस्पताल में 10:30 बजे से एकदिवासी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पटना से आये डॉ नीरज कुमार ने अनुमंडल के डॉक्टरों और नर्सों को इसके इलाज के तरीके के बारे में विस्तार से बताया।

-प्रशिक्षण में बताई गईं मुख्य बातें

पटना से आये प्रशिक्षक डॉ नीरज ने बताया कि एईएस से पीड़ित बच्चों के इलाज में बीमारी की गंभीरता को समझना ज्यादा जरूरी है। इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। 45 मिनट के अंदर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। इलाज के दौरान बच्चे को करवट लिटाया जाना चाहिए। चमकी, बेहोशी, डिहाइड्रेशन और फीवर वाले स्टेज में कौन सी दवा, किस मात्रा में दी जाए, इसके बारे में विस्तार से बताया गया।

-रेफर करने के दौरान किन बातों का ध्यान ज़रूरी

एईएस से पीड़ित बच्चों के इलाज में तत्परता बहुत जरूरी है। इसी से बच्चों की जान बचाई जा सकती है। डॉक्टर अगर उपलब्ध न हों तो नर्स कैसे प्राथमिक उपचार करें, इसके बारे में बताया गया। बच्चे को रेफर करने के क्रम में उम्र के हिसाब से ऑक्सीजन देने सहित अन्य एहतियाती कदमों के बारे में बताया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक दर्जन से अधिक नर्स और डॉक्टर ने भाग लिया। कार्यक्रम का उदघाटन उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल चकिया डॉ चंदन कुमार ने किया। मौके पर केयर बीएम कुंदन भी मौजूद रहे। मेहसी में भी डॉक्टरों और नर्सों को एईएस के इलाज के बारे में प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विस्तार से बताया गया।

रिपोर्ट : अमित कुमार