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मोतिहारी : एईएस पर जागरुकता से अभी तक नहीं आया मामला. आरती सरीखे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मेहनत लाई रंग

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एईएस पर जागरुकता फैलाने में मिसाल बनीं आरती

• -तुरकौलिया प्रखंड की चरगाहा पंचायत में इस साल अब तक एक भी एईएस का मामला नहीं

• -जीविका की सीएनारपी आरती गुप्ता सरीखे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रयास ला रहा रंग

मोतिहारी 29 जून : चमकी बुखार (faver) (एईएस) पर जागरूकता फैलाने (Disperse) में छोटे-छोटे (chote) प्रयासों की बड़ी भूमिका उभर कर सामने आ रही है। टोला-मुहल्ला स्तर पर लोगों में चमकी बुखार को लेकर जो समझ विकसित हुई है, उसमें आशा, एएनएम, सेविका, जीविका दीदी और विकास मित्रों ने काफी मेहनत की है। जागरूकता का मशाल जलाने वालों की फेहरिस्त में एक नाम जीविका की सीएनारपी (कम्युनिटी न्यूट्रिशन रिसोर्स पर्सन) आरती गुप्ता का भी है। तुरकौलिया प्रखंड की चरगांहा पंचायत में ये जिस तत्परता से चमकी बुखार के प्रति जागरुकता फैलाने का काम करती हैं, उसकी चर्चा ज़रूरी है, ताकि दूसरे लोग भी प्रेरित हो सकें।

इस साल अब तक एक भी चमकी का मामला नहीं :

सीएनारपी आरती गुप्ता यह बताती हुई काफी सुकून महसूस करती हैं कि उनकी पंचायत में इस साल अब तक एक भी बच्चा (bacha) इस बीमारी (bimari) की चपेट (chapet) में नहीं आया है। उनका कहना है , चमकी बुखार पर यह जागरूकता सामूहिक प्रयास से मुमकिन हुआ है। वह बताती हैं अभी चमकी बुखार का सीजन है। ऐसे में लोगों को अपने बच्चों के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की सलाह वह घर-घर जाकर देती हैं। लोगों को समझाने से पहले वह उनसे पूरा हाल जान लेती हैं, इसके बाद वह बच्चों के पोषण को लेकर एक-एक बात विस्तार से बताती हैं। प्रशिक्षण और जागरुकता कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेकर अपनी समझ बढ़ाती हैं और फिर लोगों को जागरूक करती हैं।

टाइम फ्रेम में बंध कर नहीं करती काम :

सीएनारपी आरती गुप्ता का कहना है, वह टाइम फ्रेम में बंध कर काम नहीं करतीं। उन्हें 10 दिन काम करना होता है, लेकिन वह 20 दिन से ज्यादा काम करती हैं। घर से 3-4 किलोमीटर दूर पिछड़ी बस्तियों में लोगों को समझाने निकलती हैं तो समय का ध्यान नहीं रहता। उन्हें इस बात से काफी खुशी मिलती है कि उनके इस जागरूकता फैलाने वाले काम से किसी परिवार के बच्चे की जान बच सकती है। आरती का कहना है इस से बड़े काम का कोई इनाम नहीं हो सकता।

लॉकडाउन में भी एईएस पर जारी रखा जागरूकता:

आरती ने बताया लॉकडाउन (Lockdown) के शुरुआती दिनों में काम करना काफी मुश्किल भरा था। लोगों में दोहरी जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी थी। कोरोना (corona) संकट के दौर में लोगों को घरों में रहने, मास्क (masks) लगाकर बाहर निकलने, सामाजिक दूरी के नियम का पालन करने और हाथों की सफाई के बारे में बताने के अलावा क्षेत्र विशेष की जो चमकी बुखार वाली समस्या है, उसके बारे में भी जागरूक करना था। तीन बजे दिन में जब घर लौटते थे, तब कहीं जाकर खाना बना पाते थे। आरती बताती हैं जन जागरूकता के इस काम में उन्हें मन लगता है। इसलिए वह पूरी तत्परता से अपनी ड्यूटी निभा रही हैं।

रिपोर्ट : अमित कुमार