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मोतिहारी : जागरूक पिता की तत्परता ने बचा ली बच्चे की जान..अब अनुभव के आधार पर कर रहे हैं दूसरों को भी जागरूक

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जागरूक पिता ने एईएस से बचा ली बच्चे की जान

• हरसिद्धि के गगनदेव सहनी ने तत्परता से बचा ली अपने बच्चे की जान
• अपने अनुभव के आधार पर दूसरे अभिभावक को भी करते हैं जागरूक

मोतिहारी 24 जून : चमकी बुखार (Fever) को लेकर अब लोगों में पहले की तुलना में जागरूकता बढ़ी है. इसी जागरुकता से इस पर काबू पाने में लोगों को काफी मदद भी मिल रही है. पहले जहाँ चमकी बुखार यानी एक्यूट इन्सेफ़लाईटिस सिंड्रोम (Acute encephalitis syndrome) (एईएस) होने पर लोग अपने बच्चे के ईलाज के लिए झाड़-फूंक या स्थानीय चिकित्सकों के पास पहुँचते थे, वहीं अब सीधे सरकारी अस्पताल की तरफ रुख करने लगे हैं. यह बदलाव सरकार के जागरुकता कार्यक्रमों और एईएस के इलाज (treatment) की बेहतर व्यवस्था (arrangement) से आया है. जिले के हरसिध्दि प्रखंड के पानपुर रंजीता गाँव के गगनदेव साहनी की कहानी भी इसी जागरूकता को प्रदर्शित करती है एवं उनके जैसे दूसरे अभिभावकों को प्रेरित करती है.

चमकी के लक्षण पहचानने में नहीं लगी देर :

हरसिद्धि के गगनदेव सहनी अगर उस रोज तत्परता न दिखाते तो शायद 8 साल के रोमी की जान पर बन आती। बात 31 मार्च की है। चार बजे सुबह का वक्त था। रोमी सोकर उठा तो उसे बुखार था। घर में बुखार की दवा थी, जिसे बच्चे को खिला दिया गया। कुछ देर में वह सो गया। एक घंटे के बाद उसके मुंह से झाग आने लगा और बच्चा अचेत होने लगा। उसके हाथ-पैर टाईट होने लगे। गगनदेव को यह समझते देर न लगी कि बच्चे को चमकी बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया है। वह तुरंत उसे हरसिद्धि पीएचसी ले गए। डॉक्टर ने बच्चे को देखा और बिना एक पल की देरी किए उसे एसकेएमसी अस्पताल में भर्ती करवाने की सलाह दी। हरसिद्धि के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रवीण किशोर प्रसाद सिंह ने एम्बुलेंस (Ambulance) मुहैया कराने में मदद भी की। एम्बुलेंस में प्राथमिक उपचार जारी रहा। एसकेएमसी अस्पताल (SKMC Hospital) में तुरंत बच्चे को भर्ती (Recruitment) कर उसका इलाज शुरु कर दिया गया।

छह दिन बाद रोमी ने खोली आंख :

एसकेएमसीएच में छह दिन बाद जब बच्चे ने आंख खोली तो घर के लोगों की जान में जान आई। गगनदेव बताते हैं बच्चे की हालत देख कर लगता नहीं था कि वह उसकी खिलखिलाहट फिर से सुन पाएंगे। छह दिनों के ईलाज के बाद बच्चे को होश भी आ गया और वह बोलने भी लगा। 21 दिन डॉक्टरों की देखरेख में रहने के बाद 20 अप्रैल को रोमी को डिस्चार्ज किया गया। ‘
‘डॉक्टरों का बहुत-बहुत धन्यवाद है कि उन्होंने बच्चे को नई जिंदगी दी। अब बच्चा तंदुरुस्त है। हम उसकी देखभाल करते रहते हैं’’ गगनदेव सहनी ने बताया.

बच्चों की देखभाल में ना बरतें लापरवाही :

जागरुकता और तत्परता से चमकी बुखार की चंगुल से अपने बच्चे को बचा चुके गगनदेव ने बताया इस बीमारी में जरा भी लापरवाही या इलाज में देरी नहीं होनी चाहिए।उन्होंने बताया वह बच्चों के अभिभावकों को अपने अनुभव के आधार पर जागरूक रहने की सलाह देंगे. उनका मानना है कि डॉक्टरों के बताए अनुसार उनके पोषण पर पूरा ध्यान दिया जाय। बच्चे को कभी भूखे पेट सोने न दिया जाय। साफ-सफाई का ख्याल रखा जाय तो बच्चा कभी बीमार नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया वह मेहनत-मजदूरी करते हैं , लेकिन फिर भी अपने बच्चे के खानपान का पूरा ख्याल रखते हैं. धूप या बारिश में बच्चे खेलने नहीं देते हैं. सब को चाहिए कि वे अपने बच्चों को लेकर सतर्क रहें।

रिकवरी रेट भी काफी उत्साहवर्धक :

श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज (Srikrishna Memorial College) अस्पताल की 21 जून 2020 की रिपोर्ट के अनुसार कुल 48 बच्चे अब तक एईएस के एडमिट हुए हैं। जिसमें 6 बच्चों की मौत हो गई, जबकि 42 को इलाज के बाद ठीक कर के घर भेजा जा चुका है। यह रिकवरी रेट काफी उत्साहवर्धक है, जो यह सकारात्मक संदेश दे रहा है कि चमकी बुखार के झोंके में अब घरों के चिराग नहीं बुझ रहे हैं।

रिपोर्ट : अमित कुमार