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मुजफ्फरपुर : तीन बार चमकी को मात दे चुका है अंकित.. हर बार सरकारी अस्पताल ने ही बचाई है जान

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तीन बार मौत के मुंह से वापस आ गया अंकित
– तीन बार चमकी से ग्रसित हो चुका है अंकित
– तीनों बार सरकारी अस्पतालों ने बचायी है जान
– फॉलोअप में ड्राई फूड का पैकेट लाते हैं डॉक्टर

मुजफ्फरपुर 24 जून : मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) एक कहावत है-जाके राखे साईयां मार सके न कोई। इस कहावत को मीनापुर प्रखंड के घोसौत गांव (Ghosaut Village) के अंकित की जिंदगी ने तब से साकार किया है, जब उसकी उम्र चार दिन की थी। दो बार चमकी की चपेट (Glowing) में आया, लेकिन भगवान ने बचा लिया। अभी वह चार साल का है। पिछले महीने वह फिर इस जानलेवा बीमारी की जद में आ गया। इस बार हालत और भी नाजुक हो गई, लेकिन इस बार बच्चे के पिता और चाचा की जागरुकता ने बच्चे की जान बचा ली। बात 14 मई की सुबह की है। अंकित के मुंह से झाग आने लगा, शरीर ऐंठने लगा। अंकित के चाचा लखीन्द्र कहते हैं कि सुबह 8 बजे मुझे घर से कॉल आया कि अंकित में चमकी का लक्षण दिख रहा है। मैं जल्दी से वहां आया। देखा तो उसके मुंह से झाग निकल रहा था और शरीर ऐंठ रहा था। यह लक्षण देखते ही मैं इसे मोटरसाइकिल (Motorcycle) से लेकर मीणापुर (Meenapur) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Health Center) गया। स्थिति तब और भयानक हो गयी, जब वह रास्ते में ही बेहोश हो गया। मीनापुर के चमकी वार्ड में उसका 2 घंटे ईलाज चला। अस्पताल से ही एम्बुलेंस (Ambulance) में अंकित को एसकेएमसीएच (SKMCH) भेजा गया, जहां जांच में उसे एईएस की पुष्टि हुई। इलाज के बाद अस्पताल (hospital) से 8 दिन में उसे छुट्टी मिली।

तत्परता ने बचा ली मेरे बच्चे की जान

अंकित के पिता उमेश कहते हैं कि उस अगर हम तत्परता नहीं दिखाते तो शायद मेरे बेटे की जान नहीं बच पाती। अंकित के चहचा बताते हैं कि मैं ऐसे ही एक बार पंचायत भवन के पास गया था, वहां ही चमकी पर दीवाल लेखन को पढ़ा था। उन्होंने कहा कि दो बार एईएस से पीड़ित होने के बाद हमने उसके लक्षण पहचान लिए थे। इसलिए हमने बिना देरी के अंकित को अस्पताल पहुंचाया। जहां उसकी इलाज के दौरान सांसे आ गयी। अभी वह बिल्कुल ठीक है।

निरंतर फॉलोअप को आते है डॉक्टर

जब अंकित एसकेएमसीएच से ठीक होकर घर आया। तब से लगभग चार-पांच बार एसकेएमसीएच और मीनापुर से डॉक्टर आ चुके है। वह घर पर ही अंकित का चेक-अप करते है। उन्होंने कहा है कि अभी वह कुपोषित है। चार साल होने के बावजूद भी उसका वजन उम्र के मुताबिक कम ही है। जब भी डॉक्टर देखने आते हैं वह ड्राई फूड के पैकेट लाते हैं, ताकि उसे पोषण मिले। इसके अलावा आशा और आंगनबाड़ी (Anganwadi) से भी रेगुलर फॉलोअप (Regular followup) के लिए आते हैं। वे फॉलोअप के दौरान अंकित को धूप में नहीं खेलने देने एवं रात को सोने से पहले कुछ खाना खिलाने की सलाह देती है. अब पूरा परिवार अंकित की देखरेख में रहते हैं। कोशिश है कि उसे सही पोषण मिले। हम दूसरों को भी जागरूक कर रहे हैं, ताकि किसी का भी बच्चा इस बीमारी की चपेट में न आए।

रिपोर्ट : अमित कुमार