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मुजफ्फरपुर : एईएस के लक्षणों से रहें सर्तक.. बच्चों के बुखार को न करें नजरअंदाज

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-बच्चों के बुखार को नज़रअंदाज़ न करें, एईएस के लक्षणों से रहें सतर्क

मुज़फ़्फ़रपुर 17 जून : बच्चों (Children) के बुखार (fever) को अब हल्के में ना लें। आपकी जागरुकता नौनिहालों को नई जिंदगी दे सकती है। एईएस के लक्षण हों तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर (Instant doctor) से दिखाएं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सामान्य और चमकी (Tinsel) बुखार में फर्क क्या है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार किसी भी साधारण या वायरल (Viral) बुखार में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसका असर दो से चार दिन तक रहता है। इसकी शुरुआत बदन टूटने व थकान से होती है। कंपकंपी व चक्कर आना भी सामान्य बुखार के लक्षण हो सकते हैं। वहीं चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज़ बुखार चढ़ा ही रहता है। बदन में ऐंठन होती है, बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमज़ोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा, जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है। डॉक्टरों के अनुसार चमकी बुखार से ग्रस्त बच्चों में पानी और हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) यानी शुगर (Sugar) की कमी देखी जा रही है। मस्तिष्क का ज्वर संक्रामक (Contagious) नहीं होता है, लेकिन ज्वर पैदा करने वाला वायरस संक्रामक हो सकता है। चमकी बुखार 15 साल तक के बच्चे को अपनी चपेट में ले रहा है।

ऐसे बचाएं बच्चों को इसके खतरे से
1. बच्चों को जूठे व सड़े हुए फल न खाने दें
2. बच्चों को उन जगहों पर न जाने दें, जहां सूअर रहते हैं
3. खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ जरूर धुलवाएं
4. पीने का पानी स्वच्छ रखें
5. बच्चों के नाखून न बढ़ने दें
6. गंदगी भरे इलाकों में न जाएं
7. बच्चों को सिर्फ हेल्दी खाना ही खिलाएं
8. रात के खाने के बाद हल्का- फुल्का मीठा खिलाएं
9. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।

रिपोर्ट : अमित कुमार