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मुजफ्फरपुर : चमकी बुखार.. जागरुकता को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सचेत.. गोद लिए गांव का किया दौरा

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मुजफ्फरपुर : चमकी के प्रति जागरुकता को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग काफी सचेत दिख रही है। 196 पंचायतों में शनिवार को सभी पदाधिकारियों ने अपने क्षेत्र में जागरुकता अभियान चलाया। इसी क्रम में जिलाधिकारी डाॅ चंद्रशेखर सिंह ने पानापुर हवेली पंचायत स्थित बंगरा चैपाल गांव में जाकर लोगों के बीच चमकी के प्रति जागरुकता बढ़ाई। जिलाधिकारी ने वहां के अभिभावकों से कहा कि वे अपने बच्चे का इलाज चाहे जहां कहीं भी कराते हों, चमकी के लक्षण दिखते ही उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पीएचसी पर लाएं। वहां इसका संपूर्ण और उचित ईलाज है।वही संचारी रोग रोकथाम पदाधिकारीे ने लोगों को चमकी बुखार के लिए प्रत्येक पीएचसी में इसके लिए बने वार्ड और वहां की सुविधाओं के बारे में बताया। वहीं कहा कि मरीज को ले जाने के लिए प्राइवेट वाहन भी टैग किए गये हैं। इसके लिए भी उन्हें पैसे नहीं देने है। सरकार उसके लिए उन्हें किलोमीटर के हिसाब से पैसे देगें। चमकी के जागरुकता के लिए प्रत्येक प्रखंडों में जागरुकता फैलायी जा रही है। चमकी के लक्षण दिखते ही 102 नंबर डायल कर एम्बुलेंस भी मंगाया जा सकता है। प्रत्येक आशा को ओआरएस के पैकेट दिए गये हैं। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे में चमकी के लक्षण हैं तो आप तुरंत ही अपने आशा और आंगनबाड़ी से संपर्क कर सकते हैं। वह भी आपकी सहायता फौरन ही करेगीं।

वहीं जिलाधिकारी ने बताया कि बच्चों में पोषण को नियमित रखने के लिए आंगनबाड़ी द्वारा पैसे भी लाभुक के खाते में जा रही है। वहीं प्रभावित इलाकों में दूध के पाउडर का वितरण भी किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हर स्तर से आपकी सहायता के लिए तत्पर है। बस आपको अपने बच्चे का ख्याल रखना है। उन्हें धूप में न निकलने दें। अपने आस -पास स्वच्छता का ख्याल रखें। रात में बच्चों को खाना जरुर खिलाएं। अगर वह भूखा भी सो रहा है तो उसे ओआरएस का घोल या चीनी पानी का घोल जरुर दें।

झोला-छाप डाॅक्टरों के कारण होती है अनहोनी

केयर के डीटीएल सौरभ तिवारी कहते हैं इस बार हो या किसी बार प्रत्येक बार लोग झोला छाप डाॅक्टर और जागरुकता के आभाव में अपने बच्चे की जान खतरे में डाल देते हैं। कितने ही मामलों में देखा गया है कि अभिभावक चमकी आने के बाद भी बुखार नहीं आने पर बच्चे को अस्पताल नहीं लाते हैं। यह उनकी सबसे बड़ी गलती है। चमकी के लक्षण दिखते ही उनको अस्पताल लाएं। वही बच्चों के बीमार होने के बाद उसे झोला छाप डाॅक्टरों के चक्कर में ज्यादा देर कर देते हैं। जिससे बच्चे की जान बचानी मुश्किल हो जाती है। वहीं एक बात लोग और समझ लें अगर बच्चे को 2 घंटे के अंदर लाया जाय तो बच्चे की जान शत-प्रतिशत बचायी जा सकती है। इस बार ग्रामीण चिकित्सकों को भी 4 मई से प्रशिक्षण मिलेगा जिसमें उनके पास आए चमकी के मरीजों को एक मिनट भी देर किए बिना नजदीकी पीएचसी में भेजने को कहा जाएगा । साथ ही चमकी के बारे में भी आधारभूत सूचनाएं दी जाएगी।

अभिभावकों को दिखानी होगी रुची:

जिलाधिकारी ने कहा चमकी में सबसे सजग बच्चों के अभिभावकों को रहना होगा। वह अपने गोद लिए गांव बोचहां प्रखंड के आदि गोपालपुर गांव के मुसहरी और मल्लाह टोला गए थे, जहां अभिभावकों ने प्रश्न पूछे उसमे था कि अगर वह ओआरएस न मंगा पाएं तो क्या कर सकते हैं। ऐसे में उनसे कहा गया कि अगर वह चीनी पानी का घोल भी बच्चे को रात में दे दें तो उनकी जान बच सकती है। वहीं अभिभावकों को समझाया गया कि चमकी के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल से बेहतर कोई नहीं है। वह किसी झोला -छाप के चक्कर में न पड़ें। बच्चे को सुबह उठाकर उससे उसके तबियत की जांच करें। उन्हें किसी भी तरह धूप में न खेलनें दें । अपने घर और आस-पास को स्वच्छ रखें। अभिाभावक की एक लापरवाही और देरी बच्चे को काल के गाल में समा सकता है।

लक्षणः अचानक तेज बुखार आना, मुंह से झाग आना, सुस्ती
क्या करेंः चीनी और नमक का घोल तुरंत दें। ओआरएस दें साथ ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। मुफ्त एबुंलेंस सेवा के लिए 102 डायल करें।
क्या न करेंः ओझा गुणी के पास न ले जाएं। झाड़ फूंक न कराएं। अस्पताल लेकर जाने में देरी न करें। झोला छाप डाक्टर के पास बिल्कुल न जाएं।

रिपोर्ट : अमित कुमार