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मुजफ्फरपुर : कालाजार के छिपे रोगियों की पहचान के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण

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मुजफ्फरपुर : कालाजार (kalabazar) के छिपे रोगियों तथा इस रोग के उन्मूलन के लिए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिए जिले के सभी प्रखंडों में बुधवार को कालाजार की इंफोर्मेशन के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस संबंध में भीबीडीसीओ पुरुषोत्तम ने कहा कि जिले में कालाजार की समाप्ति के लिए 2020 का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण का मकसद जिले में छिपे रोगियों को निकालना है। इसके लिए तीन साल के रिकार्ड के आधार पर हॉट स्पॉट रोगियों के इलाकों में छिपे रोगियों की पहचान होगी।

पारु और साहेबगंज हैं सबसे ज्यादा प्रभावित;

पुररुषोत्तम ने कहा कि जिले में सबसे ज्यादा कालाजार से प्रभावित प्रखंड पारु और साहेबगंज हैं। जिसकी सर्विलांसिंग सीधे आरएमआरआई (RMRI), पटना (patna) से होती है। वहीं बाकी प्रखंडों में भी कहीं -कहीं इस बीमारी का प्रभाव है। इस बीमारी से बचाव के लिए अपनाएं जाने वाले आइआरएस छिड़काव का प्रथम चरण पूरा हो चुका है। वहीं इसके दूसरे राउंड के की शुरुआत अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के प्रथम सप्ताह से शुरु हो जाएगा।
मीनापुर पीएचसी में भी मिल प्रशिक्षण
मीणापुर (minapur) सामुदायिक स्वास्थ्य (health) केंद्र में एमओआइसी डॉ राजेश के द्वारा रुरल हेल्थ वर्कर की इंफोर्मेशन की जानकारी दी गयी। जिसमें उनसे कालाजार मरीजों की पहचान व बीमारी के लक्षणों के बारे में बताया गया। प्रखंड में अभी कालाजार के 16 मरीज हैं। ये आरएचपी कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में जाकर कालाजार रोगीयों की पहचान करेगें।

केएल क्या है
केएल का मतलब होता है उस ग्राम या क्षेत्र का एक ऐसा प्रभावशाली चरित्रवान व्यक्ति जो उस ग्राम या क्षेत्र मे फैल रहे रोग या महामारी से बचने के लिए उस ग्राम या टोला के लोगों को उचित सलाह देते हुए संभावित रोगी को जांच एवं उपचार के लिए अपने नजदीकी सरकारी संस्थान में भेजे ताकि उस मनुष्य की जान बचायी जा सके।

कालाजार क्या है:

कालाजार एक जानलेवा बीमारी (jan lewabimari) है जो कि संक्रमित (Infected) मादा बालू मक्खी के काटने से होता है, यह बीमारी मुख्यतः दो प्रकार के होता है (1) वीएल (2) पीकेडीएल
बालू मक्खी कैसा होता है और कहाँ पाया जाता है
बालू मक्खी दो जाती के होते है नर और मादा। बालू मक्खी राइ के दाना से भी छोटा और चमकीला होता है जिसमें से नर बालू मक्खी से कालाजार का कोई भी खतरा नहीं होता है जबकि मादा बालू मक्खी से कालाजार का खतरा होता है क्योंकि मादा बालू मक्खी मांसाहारी होता है। जिसका भोजन मनुष्य का खून या अन्य मांसाहारी पदार्थ होता है । जिस कारण वह जब भी वैसे किसी मनुष्य जिसके शरीर में कालाजार के लक्षण है और उस कालाजार रोगी का उपचार कालाजार का ईलाज नहीं हुआ है उस मनुष्य के शारीर से भोजन के लिए बालू मक्खी जो खून चूसता है उसके माध्यम से बालू मक्खी के पेट में लिस्मानिया नामक पारासाईट चला जाता है और जब वह फिर किसी दुसरे स्वस्थ्य मनुष्य के शारीर से अपने भोजन के लिए खून चूसता है तो बालू मक्खी के पेट से मुहं के रस्ते लिस्मानिया नामक पारासाईट दुसरे स्वश्थ्य मनुष्य के खून में चला जाता है जिसके बाद दुसरे मनुष्य में भी कुछ दिनों में कालाजार के लक्षण आने लगते है और स्वस्थ्य मनुष्य भी कालाजार बीमारी से ग्रषित हो जाता है|

कालाजार के लक्ष्ण क्या है
कालाजार के मुख्यतः पांच लक्ष्ण है |
(1) दो सप्ताह या 15 दिनों से अधिक बुखार का होना जो कि दवा खाने से ठीक नहीं हो रहा हो
(2) जिगर या तिल्ली का बढ़ना या पेट का बाहर निकलना
(3) कमजोरी का होना
(4) चेहरा का काला होना
(5) जार के साथ बुखार का आना

पीकेडीएल कालाजार के लक्ष्ण
क्या है
पीकेडीएल कालाजार के निम्न लक्ष्ण है |
(1) चेहरा या शारीर के किसी भी भाग में चकत्ता या गाठ जैसे दाग का उभरना जिससे किसी प्रकार के परेशानी का न होना |
इस रोग में प्राय़ः देखा गया है कि 95% ऐसे व्यक्ति को होता है जो कि पूर्व में कभी न कभी वीएल कालाजार से ग्रसित रहे हो और 5% जिन्हें पहले वीएल कालाजार नहीं हुआ था या कुछ दिनों पहले कुछ दिनों के लिए बुखार आया था ठीक हो गया |

कालाजार के जाँच की क्या व्यवस्था (arrangement) है
कालाजार बीमारी के जाँच किसी भी सरकारी अस्पताल (hospital) में बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध है जिसका जाँच रिपोर्ट उसी दिन थोरी देर में संभावित रोगी को बता दिया जायेगा|
कालाजार रोग का उपचार कहाँ,कैसे और कितना समय में होगा
कालाजार रोग का उपचार एक द मुजफ्फरपुर जिला के जिला अस्पताल मुजफ्फरपुर,मेडिकल कॉलेज मुजफ्फरपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पारु ,साहेबगंज,मोतीपुर,सरैया में बिल्कुल फ्री में उपलब्ध है।

रिपोर्ट : अमित कुमार