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मुजफ्फरपुर : चमकी पर महिला पर्यवेक्षिका और आशा फैसिलेटर को मिला प्रशिक्षण.. सोशल डिस्टेसिंग का रखा गया ख्याल

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मुजफ्फरपुर : एईएस या चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिले के सभी 16 प्रखंडों में सोमवार को आशा फैसिलेटर एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा गया। प्रशिक्षण में मुख्य रुप से एईएस से संबंधित केस की पहचान, पहचान होने पर क्या किया जाय, एबुंलेंस तथा वाहनों का प्रयोग कैसे हो, मरीज को तुरंत कैसे अस्पताल पहुंचाया जाए तथा जनजागरुकता तथा अनुश्रवण आदि के संबंध में सभी बुनियादी बातों से अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण के दौरान कांटी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. यूपी चैधरी ने आशा फैसिलेटरों को बताया चमकी एक गंभीर बीमारी है जो ससमय इलाज से ठीक हो सकता है। यह बीमारी अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में होती है। एक से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते है। प्रशिक्षण के दौरान महिला पर्यवेक्षिकाओं तथा आशा फैसिलेटरों को ओआरएस घोल बनाने की विधि भी बताया गया। .वहीं मस्तिष्क ज्वर के लक्षण में सरदर्द, तेज बुखार आना, शरीर में चमकी होना या हाथ पैर में थरथराहट होना। पूरे शरीर या किसी एक अंग में लकवा मार देना शामिल है। अगर कहीं किसी में चमकी के लक्षण दिखाई दे तो पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा का हवा करें ताकि बुखार को 100 डिग्री से कम रखा जा सके। पारासिटामोल की गोली चिकित्सकीय सलाह पर ही दें। अगर बच्चा बेहोश नहीं है तो उसे ओआरएस का घोल पिलाएं। चमकी आने की दशा में मरीज को बाएं या दाएं करवट में लिटाकर ले जाएं। अगर मुंह से झाग निकल रहा हो तो उसे साफ कपड़े से पोछे।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने क्या न करने की सलाह में कहा, बच्चों को खाली पेट लीची न खिलाएं। बच्चे को गर्म कंबल या गर्म कपड़े में न लपेटें। आपातकाल की स्थिति में 102 नंबर डायल करें। प्रशिक्षण में प्रत्येक प्रखंड के सीडीपीओ के साथ केयर के प्रतिनिधियों ने भी सहयोग किया। इस प्रशिक्षण के बाद यह महिला पर्यवेक्षिकाएं और आशा फैसिलेटर अपने क्षेत्र की आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेगीं।

लक्षणः अचानक तेज बुखार आना, मुंह से झाग आना, सुस्ती
क्या करेंः चीनी और नमक का घोल तुरंत दें। ओआरएस दें, साथ ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। मुफ्त एबुंलेंस सेवा के लिए 102 डायल करें।
क्या न करेंः ओझा गुणी के पास न ले जाएं। झाड़ फूंक न कराएं। अस्पताल लेकर जाने में देरी न करें। झोला छाप डाक्टर के पास बिल्कुल न जाएं।

                   रिपोर्ट : अमित कुमार