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नालंदा : प्रखंड के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की की गई समीक्षा,, मशरूम को नियमित आहार में शामिल करने की हुई बात

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नालंदा (बिहार) : हरनौत बाल विकास परियोजना (Harnaut Child Development Project) व कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से प्रखंड स्थित पांच आंगनबाड़ी केंद्रों (Anganwadi centers) में मशरुम आधारित पोषण व व्यवहार गत परिवर्तन का अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत प्रत्येक लाभुक को ढाई सौ ग्राम मशरुम देना था। हालांकि कोरोना (Corona) संकट के कारण अभियान पूरा नहीं हो सका। इसके लिए आने वाले समय में इसके संभावित विस्तार को देखते हुए कोरोना बंदी के पहले के कार्य की समीक्षा की गई।
प्रखंड परिसर स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में सीडीपीओ जया मिश्रा (CDPO Jaya Mishra) की अध्यक्षता में बैठक (Miting) की गई।
गृह वैज्ञानिक डॉ ज्योति सिन्हा ने कहा कि मानव शरीर में संतुलित पोषण प्रबंधन के लिए मशरुम आधारित भोजन समय की जरुरत है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं व बच्चों में कुपोषण के मामले बहुत ज्यादा आते हैं। ऐसे में यदि मशरुम को अपने नियमित आहार में शामिल करें तो नीम-हकीमों का चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा।
सीओ अखिलेश चौधरी ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में रफ एंड टफ खाने की आदत ने लगभग आबादी का हाजमा बिगाड़ कर रख दिया है। इससे कुपोषण अब अमीरी व गरीबी में भेद नहीं करती है।
बीडीओ रवि कुमार ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रुप में मशरुम को नियमित आहार में शामिल करने के लिए पांच केंद्रों पर शुरू की गई योजना का भविष्य में विस्तार संभावित है। कोरोना संकट के चलते भले उसमें बाधा आई है। पर, यह अभियान सामुदायिक विकास के लिए बेहद जरुरी है।
बैठक में सुपरवाइजर रेणू कुमारी व वेदू कुमारी भी मौजूद थे।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद