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नालंदा : कोरोना का संक्रमण और डर खत्म करने को लेकर की जा रही गतिविधियां, बढ़ा रही लोगों में उत्साह

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-गतिविधियों से प्रवासियों में बढ़ रहा उत्साह

* ऐसे खत्म होगा कोरोना का डर व संक्रमण

नालंदा (बिहार) हरनौत : (Bihar Harnaut) क्वारेंटाइन सेंटर (Quarantine Center) पर रह रहे प्रवासियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से व्यस्त रखने की मुहिम शुरू की गई है। इसमें सुबह और शाम योगा व कोरोना गीत पर तालियां बजवाना नित दिन की दिनचर्या बन चुकी है। इसके अलावा भी सेंटर पर ड्युटी करने वाले खासकर शिक्षक अपनी जानकारी के आधार पर प्रवासियों के बीच मनोरंजक गतिविधि करवा रहे हैं। इन सबके बीच सोशल डिस्टेंस (Social distance) व अन्य सुरक्षा उपाय भी सख्ती से पालन करवाये जा रहे हैं।
बीडीओ (video) रवि कुमार ने बताया कि सीओ अखिलेश चौधरी, सीडीपीओ (CDPO) जया मिश्रा, पीओ शिवनारायण लाल, बीएओ रामदेव राम के साथ डॉक्टर राजीव रंजन सिन्हा, डॉ राकेश रंजन, डॉ अंकिता कुमारी सहित कुछ अन्य सक्रिय लोगों ने मिल-बैठकर गहन मंथन किया था। इसमें यह बात निकलकर सामने आई कि सेंटर पर रह रहे प्रवासियों में विभिन्न रोक-टोक के चलते एकांकीपन बढ़ रहा है। इससे कोरोना के डर के साये में रह रहे प्रवासियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता घट रही है, जिससे कोरोना (corona) संक्रमण खतरनाक रुप ले सकता है।
इन्हीं कारणों की वजह से अफसर क्वारेंटाइन सेंटर पर प्रवासियों को विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रखने का निर्देश वहां तैनात कर्मियों को दे रहे हैं।
खासकर शिक्षकों के इस हुनर में निपुण रहने को लेकर उनसे विशेष सहयोग की अपील की गई है।
सिरनावां रोड में रामकृपाल सिंह बीएड कॉलेज के सेंटर में इसकी शुरुआत कर दी गई है। कर्मी सुजीत कुमार बताते हैं कि प्रत्येक दिन की शुरुआत के बाद सभी से बारी-बारी उनका स्वास्थ्य संबंधी फीडबैक लिया जाता है। इसमें पीड़ित लोगों की जांच मेडिकल टीम करती है। आवश्यक कार्यवाही के बाद चाय-नाश्ता-भोजन के निपटारा चलते रहने के बीच सभी अपने स्थान पर जमकर अपनी खट्टी-मीठी यादों को ताजा करते हैं। कुछ की बातें गुदगुदाती तो कुछ की आंखें भर लाती हैं।
इसके बाद भजन, गीत और गाने से भी लोग अपने दिल का दर्द बांटते हैं।
शाम में कुछ शारीरिक क्रियाओं के बाद पुरुष छत पर, जबकि महिलाएं बालकनी में खड़े होकर कोरोना गीत पर मिलकर तालियां बजाते हैं। इस तरह दिन भर में गतिविधियों के चलते समय उबाऊ नहीं होता और प्रवासियों का मन भी लगा रहता है।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद