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नालंदा : गरमा मूंग में दाना नहीं आने किसान हैं परेशान… कृषि वैज्ञानिकों ने लिया जायजा

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-गरमा मूंग में दाना नहीं आया, कृषि वैज्ञानिक ने लिया जायजा

नालंदा (बिहार) : हरनौत (Harnaut) प्रखंड के सेवदह गांव में कई किसानों ने गरमा मूंग की खेती की है। इनमें अगेती फसल में कटुआ कीट का प्रकोप होने से नुकसान हुआ। अब पिछेती मूंग की फसल में दाना नहीं आने से किसानों में मायुसी छा गई है।
इसकी जानकारी मिलने पर कृषि वैज्ञानिक (Agricultural Scientist) डॉ उमेश नारायण उमेश ने सेवदह पहुंचकर किसान विजेंद्र सिंह सहित कुछ अन्य किसानों के प्लॉट की जांच की। उन्होंने मूंग के एसएमएल (SML) 668 प्रभेद की खेती करते आये हैं और क्षेत्र के लिये सुटेबल भी है।
डॉ उमेश ने बताया कि मार्च महीने में गरमा मूंग की अगेती खेती शुरू की गई। उस समय अपेक्षाकृत मौसम ठंढा रहा था, जिससे कटुआ कीट ने पौधे का काफी नुकसान किया। हालांकि जो पौधे बचे उसमें फलन अच्छा हुआ।
जबकि पिछेती मूंग की फसल में जब फूल का समय आया तो लगातार कुछ अंतराल पर बारिश होती रही। इससे पौधे की बढ़वार तो अच्छी हुई। पर, फली में दाने ही नहीं आये। इसकी वजह बारिश से फूलों में परागण की कमी हुई। जबकि, अब मौसम में सुधार से पौधे की नई फली में दाने बढ़िया आये हैं।

:: फल के साथ फसल अवशेष भी हैं उपयोगी

डॉ राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि जब बच्चे छह माह के होते हैं तो उन्हें मां के दूध के अलावा अतिरिक्त आहार की शुरुआत की जाती है। इसमें दाल का पानी और खिचड़ी प्राथमिकता से दिये जाते हैं। उसमें भी मूंग के दाल को बेहतर माना जाता है। क्योंकि यह काफी सुपाच्य होता है। बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास में मूंग की दाल का सेवन उपयोगी होता है। अधिक उम्र के लोगों के लिए भी आहार का बेहतर विकल्प है।
मिट्टी वैज्ञानिक डॉ उमेश नारायण उमेश ने कहा कि फसल से फल निकाल लेने के बाद शेष फसल अवशेष को मिट्टी में मिला दिया जाता है। यह खरीफ की फसल के लिए मिट्टी में पोषक तत्व प्रबंधन का बेहतर विकल्प है। इसीलिए इसे हरी खाद भी कहते हैं।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद