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नालंदा : वन विभाग लगायेगा चालीस हजार पौधे… जल जीवन हरियाली के लक्ष्य होंगे हासिल

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-हरनौत में वन विभाग लगायेगा 40 हजार पौधे : श्वेता प्रियदर्शी

* प्रक्षेत्र में तैयार हो रहे एक लाख 20 हजार पौधे,

नालंदा (बिहार) : (Nalanda) हरनौत (Harnaut) प्रखंड परिसर से पुरब वन विभाग प्रक्षेत्र में इस माह के अंत तक एक लाख 20 हजार पौधे तैयार हो जायेंगे। इनमें से कम से कम चालीस हजार पौधे हरनौत प्रखंड में लगाने का लक्ष्य है। ये जानकारी वन विभाग की प्रखंड प्रभारी अवर निरीक्षक श्वेता प्रियदर्शी ने दी।
उन्होंने बताया कि बिहारशरीफ अनुमंडल के अस्थावां में एक लाख, रहुई में पचास हजार के साथ हरनौत में एक लाख 20 हजार पौधे तैयार हो रहे हैं।
इसके अलावा हिलसा व राजगीर अनुमंडल का अलग लक्ष्य है। आगामी नौ अगस्त को जल-जीवन-हरियाली दिवस पर राज्य में ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। उसी को लेकर यह तैयारी की जा रही है।
श्वेता प्रियदर्शी ने बताया कि पौधारोपण का काम तीन वर्गों में होगा। सभी सरकारी व गैरसरकारी संस्थान के परिसर में वन विभाग खुद पौधा लगवायेगा।
मनरेगा से सार्वजनिक स्थानों अलंग आदि पर पौधे लगेंगे। इसके अलावा किसान अपनी निजी जमीन पर भी पौधे लगवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अभी ये प्राथमिक दिशा-निर्देश है। इसमें अभी और संशोधन की गुंजाइश है।

:: मिलेंगे आम के आम गुठलियों के भी दाम

प्रभारी श्वेता प्रियदर्शी ने बताया कि निजी जमीन पर पौधा लगाने के लिए किसान को प्रति पौधा दस रुपये का शुल्क लगेगा।
अगर किसान तीन वर्षों तक पौधे का रखरखाव सही तरीके से कर लेंगे। तब उन्हें वह दस रुपये तो वापस होंगे हीं। इसके अलावा प्रत्येक जीवित पौधे पर अतिरिक्त साठ रुपये प्रोत्साहन के रुप में मिलेंगे। साथ ही पौधे से मिलने वाले फल-फूल व जलावन उनका अपना होगा। पेड़ पर उनका अपना स्वामित्व होगा।
निजी जमीन पर पौधारोपण के लिये किसान को आधार कार्ड (Aadhar Card), बैंक खाता (Bank account) का पासबुक (Passbook) और जमीन की रसीद लानी होगी।

:: छात्रों को मिलेंगे पौधे

श्वेता प्रियदर्शी ने बताया कि वर्ग नौ से नीचे की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी बिना शुल्क एक-एक पौधा देने की योजना है। वे इसे अपने घर के आसपास लगायेंगे। इसका आशय उन्हें पौधा लगाने को प्रेरित करने के साथ उसकी सुरक्षा करने की भी है।

:: 22 प्रजातियों के पौधे हैं उपलब्ध

प्रक्षेत्र में 22 प्रजातियों के एक लाख 20 हजार पौधे तैयार किये जा रहे हैं। इन प्रजातियों में आम, अमरुद, नीम, आंवला, सागवान, काला और सफेद शीशम, गम्हार, महोगिनी, कटहल आदि शामिल हैं।

:: पेड़ों के हैं कई फायदे

श्वेता प्रियदर्शी ने बताया कि पेड़ लगाने का उद्देश्य केवल फल-फूल व जलावन नहीं होता। यह पर्यावरण संतुलन का मुख्य कारक है।
वर्तमान में प्रदेश जलवायु परिवर्तन के चलते प्रभावित है। फसल के नुकसान से कृषि से भी लोग विमुख होते जा रहे हैं। इसके अलावा हवा और पानी का प्रदूषण हो रहा है, जिसके चलते अधिकांश बीमारी फैलती है।
अगर आबादी के अनुपात में वन आच्छादन होगा तो मौसम अनुकूल रहेगा।
खेतों के आसपास पेड़ रहने से ज्यादातर कीट उनकी पत्तियों पर शरण लेते हैं। इससे खेत की फसल को नुकसान कम होता है। साथ ही उपज की गुणवत्ता भी मिलती है।
पर्याप्त वन आच्छादित रहने से मौसम चक्र सही रहता है। शुद्ध हवा और पानी मिलता है।


                          रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद