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नालंदा : (हरनौत)..रेलवे कारखाना में दानापुर.. तिलैया पैसेंजर के बारह कोच तैयार.. भेजा गया दानापुर डिविजन

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नालंदा (बिहार) हरनौत : देश में कोरोना संकट के बाद भी अल्टरनेट व्यवस्था के तहत सवारी डिब्बा मरम्मत कारखाना में अधिकारी व कर्मी अपने दायित्वों का निर्वहन सफलतापुर्वक कर रहे हैं। इसी क्रम में दानापुर-राजगीर-तिलैया सवारी गाड़ी के बारह कोचों की मरम्मत के बाद इसे दानापुर डिविजन को भेज दिया गया है।
मुख्य कारखाना प्रबंधक प्रकाश चौधरी ने बताया कि लॉकडाउन में कोरोना वायरस फैलाव को देखते हुये कुछ दिनों तक कारखाना में रिपेयरिंग वर्क स्थगित किया गया था। बीस अप्रैल से उपलब्ध कर्मियों को अल्टरनेट व्यवस्था के साथ काम शुरु किया गया। इसमें सबसे पहला लाभ दानापुर से तिलैया पैसेंजर के कोचों को मिला। लॉकडाउन के दौरान रिपेयरिंग के लिये कोच भेजे गये थे। इनकी रिपेयरिंग कर डिविजन को सौंप दी गई है।

:: 18 महीने में होना रहता है पीओएच

रेलवे सूत्रों के अनुसार विभिन्न रुटों में चलने वाले यात्री ट्रेनों के कोचों की 18 महीनों में पीरियॉडिक ओवर हाव्लिंग(पीओएच) करने का नियम है।
अठारह महीने तक विभिन्न रुटों पर चल चुकी ट्रेनों के कोचेज् का भौतिक सत्यापन के बाद डिविजन के इंजीनियर उसकी मरम्मत में लगने वाले खर्च का आकलन करते हैं। इसे जरुरी मेंटेनेंस के आधार पर लाइट अथवा हैवी वर्क में बांटा जाता है।
रिपेयरिंग के लिये कारखाना में भेजे जाने पर वहां के इंजीनियर द्वारा पुन: रिपेयरिंग वर्क का आकलन कर उसकी रिपोर्ट डिविजन को दी जाती है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरु हो जाता है।
कोचों की रिपेयरिंग का खर्च संबंधित डिविजन उठाती है। हैवी वर्क का खर्च 15 से 20 लाख तक का होने की बात कही जाती है।

:: हर ठहराव के लिये मिलता है भुगतान

हमारे देश में रेलवे का विशाल नेटवर्क है। इसकी सवारी आम से खास तक करते हैं। माल आदि ढोने में मालगाड़ियों का व्यवहार किया जाता है।
रेल सूत्र बताते हैं कि ट्रेन संबंधित डिविजन की संपत्ति होती है। यात्री अपनी यात्रा का टिकट कटाते हैं तो वह राशि सीधे मालिकाना हक रखने वाले डिविजन के कोष में जमा होती है। जब संबंधित ट्रेन परिचालन में आती है तो उसके परिचालन शुरु होने और खत्म होने वाले स्टेशन के साथ हर ठहराव वाले स्टेशनों को कटे हुये टिकटों से प्राप्त राशि में से उसके हिस्से की राशि बंटती चली जाती है।
यही राशि संबंधित स्टेशन और उस रेलखंड के विकास में अह्म भुमिका निभाती है। इसी वजह से यात्रियों को सिर्फ अपनी प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र में रेलवे के संसाधन को विकसित करने के लिये ही हमेशा टिकट के साथ यात्रा की सलाह दी जाती है।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद