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नालंदा : लाकडाउन की वजह से बंद पड़े स्कूलों पर बढ़ा आर्थिक बोझ.. दस लाख सहायता राशि देने की उठी मांग

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नालंदा (बिहार) हरनौत : कोरोना वायरस के फैलाव पर नियंत्रण के लिए देश में 54 दिनों से संपूर्ण लॉकडाउन है। एहतियात में सभी सरकारी व प्राईवेट स्कूल में सभी गतिविधि लगभग बंद है। अधिकांश प्राईवेट व शिक्षा विभाग से रजिस्टर्ड स्कूल किराये के मकान में चलते हैं। छात्र-छात्राओं को लाने व घर पहुंचाने को वाहन हैं। शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्यों के लिये शिक्षक व अन्य कर्मी हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का ही कहना है कि इस अवधि में किसी भी कर्मी का वेतन नहीं काटना है। साथ ही नौकरी से निकालना भी नहीं है। जबकि छात्रों से इस अवधि का शुल्क लेने की भी मनाही है। इस परिस्थिति में स्कूल प्रबंधन के समक्ष गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस वजह से सरकार इस विकट घड़ी में प्रत्येक स्कूल को दस लाख की सहायता राशि दे। अन्यथा शिक्षक, सहायक, वाहन चालक, अटेंडेंट सहित भवन का किराया चुकाने में असमर्थ हैं।
इससे स्कूल परिवार से जुड़े कर्मियों व उनके परिवार के समक्ष भुखमरी के हालात बन रहे हैं।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद