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नालंदा : डाकू मोहर सिंह के निधन पर सद्भावना मंच ने दी श्रधांजलि..नेक कार्यों के लिए किए गए याद

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नालंदा : डाकू मोहर सिंह के निधन पर सद्भावना मंच (भारत) की ओर से बिहारशरीफ स्थित आलमगंज में समाजसेविका मोनी कुमारी के आवास पर लॉक डाउन एवम सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर मंच के संस्थापक एवं प्रख्यात समाजसेवी दीपक कुमार ने कहा कि डाकू मोहर सिंह का निधन मंगलवार की सुबह उनके आवास पर ही हो गया था। वे मधुमेह से पीड़ित थे । चंबल घाटी में अन्याय के खिलाफ बंदूक उठाने वाले मोहर सिंह ने 1972 में महात्मा गांधी की तस्वीर के समक्ष अपनी बंदूकों का समर्पण कर पूरी दुनिया को अहिंसा का जो संदेश दिया वह दुनिया के इतिहास में हिंसा के समर्पण की बड़ी घटना थी। उन्होंने करीब 80 से ज्यादा हत्याएं की थी। और उन पर पुलिस रिकॉर्ड में 300 से ज्यादा मामले दर्ज थे। मोहर सिंह जमीनी विवाद के बाद 1958 में चंबल में कूद गए थे। सरकारी दस्तावेजों में उन पर तब ₹2 लाख का इनाम था, वहीं उनके गैंग पर 12 लाख का इनाम था। लेकिन 1972 में प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय गांधीवादी विचारक डॉ एस एन सुबाराव उर्फ भाई जी के अथक प्रयास के कारण विनोवा एवम् लोकनायक जयप्रकाश नारायण की मौजूदगी में उन्होंने साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था।तथा जेल से छूटने के बाद वे लगातार 30 वर्षों तक पूरे देश में घूम-घूम कर सद्भावना एवं अहिंसा का प्रचार करते रहे। दीपक कुमार ने बताया कि डाकू मोहर सिंह के साथ भाई जी के कार्यक्रमों में देखने एवम् उनके विचारों को सुनने का मौका मिला था।वे जीवन पर्यन्त गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करते रहे। एक जमाने में डाकू मोहर सिंह का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे, वही हृदय परिवर्तन के कारण उन्होंने समाज में एक मिसाल पेश किया ।92 साल की उम्र में पूरी दुनिया को यह संदेश देकर वह अमर हो गए। अहिंसा के रास्ते से ही हम दुनिया में शांति और भाईचारा ला सकते हैं। वहीं इस मौके पर समाजसेविका मोनी कुमारी ने कहा कि भाई जी की प्रेरणा से मोहर सिंह जी का हृदय परिवर्तन हुआ जो कि इतिहास में एक अनोखा उदाहरण है। खासकर गरीब लड़कियों की शादी कराने में वे काफी दिलचस्पी लेते थे। इतिहास में डाकुओं का आत्मसमर्पण एक ऐसी घटना हुई जिससे साबित होता है कि बुरा से बुरा आदमी भी अच्छा बन सकता है। और समाज के लिए एक नई प्रेरणा दे सकता है। धन्य है ऐसे लोग इतिहास में अमर रहेंगे।

            रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद