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नालंदा : घंटों बना रहेगा सुरक्षा चक्र..कृषि सलाहकार ने ईजाद की सेनिटाइजर

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नालंदा (बिहार) हरनौत : कोरोना की वैश्विक महामारी से बचाव को इसका वैक्सीन बनाने के लिये दुनिया भर के वैञानिक दिन-रात एक किये हुये हैं। उसके बाद भी प्रगति सौ दिन चले ढाई कोस की है। पर, प्रखंड की डिहरी पंचायत के युवा कृषक सलाहकार सुजीत कुमार ने अपने अध्ययन की बदौलत कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिये सैनिटाईजर ईजाद किया है। सामान्य सैनिटाईजर में स्प्रीट का ही प्रयोग मुख्य रुप से किया जाता है। इसका असर मात्र 15 से 20 मिनट तक रहता है। जबकि सुजीत के द्वारा ईजाद सैनिटाईजर का असर 15 से 20 घंटे तक रहता है।
कृषक सलाहकार सुजीत कुमार ने बताया कि उन्हें कृषि कार्य संबंधी ट्रेनिंग में कीट-व्याधियों के बारे में भी बताया गया था। किस तरह के कीट की रोकथाम कैसे करनी है? इसकी भी गूढ़ जानकारी उन्हें दी गई थी। देश और खासकर जब राज्य में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो उन्होंने अपने अध्ययन को फिर से दोहराया।
इससे पता लगा कि कोरोना वायरस सामान्य कीटाणु है। पर उसका संक्रमण बेहद खतरनाक है। यदि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो तो वायरस अपना संक्रमण तेजी से करता है। यह शरीर में श्वसन तंत्र व रक्तसंचार को बाधित कर देता है। हालांकि अभी तक इसका कोई सटीक इलाज नहीं मिल सका है। पर, यदि इस वायरस के फैलाव को नियंत्रित किया जाय तो संक्रमण का खतरा काफी कम होगा।
इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्लीचिंग पावडर, सैवलॉन, डिटॉल, सैट्रिसीलिन व स्प्रीट मिलाकर एक घोल तैयार किया और आजमाया है। यह मिनटों नहीं घंटों तक वायरस के फैलाव को नियंत्रित करता है।

::प्रखंड परिसर व सेंटर में कर रहे छिड़काव

आज सुजीत कुमार स्वयं कृषि कार्य में उपयोगी स्प्रे मशीन से प्रखंड परिसर में सुबह और शाम खुद के बनाये सैनिटाईजर का छिड़काव करते हैं।
यही नहीं, उनकी ड्युटी रामकृपाल सिंह बीएड कॉलेज में बने क्वारेंटाईन सेंटर में लगी है। वे वहां निर्धारित अवधि में पहुंचने पर और वहां से छूटने के दौरान इस घोल का छिड़काव करते हैं।
हालांकि उन्हें इसके लिये अलग से कोई राशि नहीं दी जाती है। पर, उनका कहना है कि कोरोना को हराना है तो धरती का कर्ज मिटाना पड़ेगा।

:: कृषि में भी तकनीक के सुपर मॉडल हैं सुजीत

कृषक सलाहकार होने के नाते सुजीत कुमार अक्सर किसानों के बीच रहते हैं। खेत तैयार करने से बुआई, निराई, सिंचाई व कटनी और अनाज के रखरखाव तक में वे किसानों का मार्गदर्शन करते हैं।
सुजीत बताते हैं कि कुछ किसान छोटी जोत वाले, कुछ आर्थिक रुप से कमजोर और कुछ संपन्न हैं भी तो तकनीक की जानकारी के अभाव में परंपरागत खेती ही कर पाते हैं। इसमें कृषि लागत बढ़ जाती है। पर, उपज अक्सर प्रतिकूल मौसम और कीट-व्याधियों के चलते प्रभावित होती है।
वर्तमान में खरीफ की खेती शुरु होनी है।
सुजीत बताते हैं कि क्षेत्र में मुख्यत: खरीफ में धान की खेती की जाती है। तकनीक की जानकारी नहीं होने से किसान परंपरागत खेती करते हैं। हाथ की कमी से श्रीविधि जैसी विधियों का लाभ लेने का रिस्क नहीं उठा पाते हैं। वैसे किसानों को बिचड़े की रोपाई के दौरान पौधों के बीच कम से कम 25 सेमी की दूरी बनाकर पंक्ति में रखने की सलाह देते हैं।
उन्होंने बताया कि इससे सुर्य की रौशनी पौधे की जड़ तक पहुंचती है। तेज हवा-पानी से पौधे के गिरकर नुकसान की आशंका भी कम होगी।
पिछले कुछ वर्षों में इस तकनीक से फसल की उपज डेढ़ गुनी तक बढ़ी है।

                                 रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद