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नालंदा : सात दिवसीय महामृत्युंजय सह पार्थिव पूजन की हुई शुरुआत.. भक्तों की जुड़ी है आस्था

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पार्थिव पूजन से पूरी होती है मनोकामना

* अलीनगर में शुरू हुआ सात दिवसीय महामृत्युंजय सह पार्थिव पूजन

नालंदा (बिहार) : हरनौत असमय मृत्यु (Hernaut untimely death), दुर्घटना (Accident), शोक (Mourning) व पीड़ा के कारणों से छुटकारा दिलाना अथवा संकट को कम करने के लिए महामृत्युंजय का जाप किया जाता है। जबकि, पार्थिव पूजन (Earth worship) ईश्वर (God) को साक्षात करने की वह विधि है, जिससे आपकी मनोकामना (desire) पूर्ण होती हैं। ये बातें आचार्य आदित्य नारायण पांडेय ने कही। उन्होंने प्रखंड के अलीनगर गांव में सात दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ सह पार्थिव शिवलिंग पूजन की शुरुआत कराई। साधक गांव के शैलेंद्र महतो व उनकी पुत्री सुलोचना बनीं।
आचार्य श्री पांडेय ने कहा कि पर्थ मतलब मिट्टी और पार्थिव यानि मिट्टी से बनी हुई। पार्थिव शिवलिंग पूजन में मिट्टी से बने शिवलिंग, गौरी, गणेश, नंदी, वीरभद्र, कुबेर, कार्तिकेय, कीर्तिमुख व सर्प सहित भगवान शंकर की सपरिवार पूजा की जाती है। पार्थिव पूजन में निर्माण के बाद उनकी पूजा और फिर उनका विसर्जन बहते जल में किया जाता है। यह प्रक्रिया सातों दिन होगी। इस वजह से किसी मंदिर में शिवलिंग की पूजा से पार्थिव शिवलिंग पूजन का महत्व अधिक है।
आचार्य ने बताया कि साधक अक्सर कष्ट में ही जीवन व्यतीत कर रहे थे। साधिका सुलोचना का कहना है कि उनके द्वारा मार्गदर्शन पायी छात्रा आज सफलता के मुकाम पर है। जबकि, वह आज भी कैरियर के लिए संघर्ष कर रही है। मंत्रोच्चारण के बीच मिट्टी से शिव परिवार का निर्माण, पूजन व विसर्जन की विधि को देखने श्रद्धालु वहां बड़ी संख्या में पहुंच कर इसके भागीदार बन रहे हैं।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद