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नालन्दा : आंखों के साथ दिल और पेट के लिए मीठा करेला फायदेमंद

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नालन्दा (बिहार) हरनौत : बरसात का मौसम आते ही बाजार में हरी सब्जियों की बाढ़ आ जाती है।(As the rainy season approaches, there is a flood of green vegetables in the market.)  इन्हीं में से एक ककोरा (Kakora) है। शहरी इलाकों में कंटोला (Cantola) और ग्रामीण क्षेत्र में यह खक्शी नाम से भी प्रचलित है। यह करेले की प्रजाति का होता है। पर कड़वा नहीं होता। इस वजह से इसे मीठा करेला भी कहा जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के व्यंजन के साथ पावडर के रुप में उपयोग करके आंख के साथ दिल और पेट को भी सेहतमंद रख सकते हैं। ये जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र की बागवानी विशेषज्ञ डॉ विभा रानी ने दी।
उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में संक्रमण की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा अभी कोरोना वायरस का संक्रमण (Corona virus infection) भी चिंता का सबब बना है। इस वजह से खानपान में भी विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है।
कंटोला बेल में फलने वाला फल है। यह पकता है तो रंग हल्का पीला हो जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, फाइबर सहित कई खनिज लवण पाये जाते हैं। एस्कॉर्बिक एसिड, कैरोटीन, थियामिन, रिबोफ्लेविन और नियासिन जैसे विटामिन की अल्प लेकिन शरीर के लिए पर्याप्त मात्रा उपलब्ध होती है। जबकि, इसके लिए अक्सर लोग जांच व दवा के लिए काफी धन बर्बाद करते हैं।
इसके पर्याप्त मात्रा में सेवन से रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे दिल की बीमारी नियंत्रित रहती है। इसमें मौजूद फाइटो पोषक तत्व पॉलीपेप्टाइड-पी शरीर में मौजूद अतिरिक्त शुगर के स्तर को कम करता है। इससे यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद है।
विटामिन ए की भरपूर मात्रा होने से आंख से संबंधित समस्याओं का भी निदान करता है। इन्हें स्वस्थ रखता है।
गर्भवती महिला में अक्सर कोशिका विकार से प्रजनन संबंधी समस्या उत्पन्न हो जाती है। इससे प्रसव के समय जच्चा-बच्चा को खतरा बना रहता है। इसके नियमित सेवन से तंत्रिका दोष को दूर करता है।
शरीर में हानिकारक फ्री-रेडिकल्स की मौजूदगी कैंसर का कारक बनती है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट की अच्छी मात्रा होने से यह फ्री-रेडिकल्स को नष्ट कर कैंसर होने की आशंका को कम करता है।
इसमें गुर्दे और मूत्राशय का स्टोन यानि पथरी हटाने की क्षमता होती है। इसके लिए कंटोला के बीज का दस ग्राम पावडर एक गिलास दूध में मिलाकर या कंटोला के नियमित आहार से लाभ होता है। बाबासीर के उपचार में पांच ग्राम कंटोला पावडर चीनी के साथ नियमित दो बार सेवन से लाभ होता है।
इसकी पत्तियों को उबालकर शहद के साथ सेवन करने से बुखार में राहत मिलती है।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद