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नालंदा : टाल क्षेत्र के किसानों की स्थिति है खराब, प्रकृति की मार के साथ विभाग की अनदेखी से हैं परेशान

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प्रकृति की मार के बाद रुला रहा विभाग

* टाल क्षेत्र के किसानों की हालत खराब

नालंदा (बिहार) : हरनौत (Harnaut) पिछले वर्ष खरीफ के सीजन में सूखाड़ हो गई। इस वजह से टाल क्षेत्र में किसानों ने धान की खेती की। ऐन कटनी से कुछ पहले हुई भारी बारिश टाल के धान को बहा ले गई। उस समय धनहर खेत के किसानों ने सूखाड़ तो टाल क्षेत्र से बाढ़ से नुकसान के मुआवजा को आवेदन दिये गये थे।
सूखाड़ का मुआवजा मिला, पर टाल वालों को एक साथ सूखाड़ और बाढ़ मुआवजा की बात पर आवेदन स्वीकृत ही नहीं हुआ।
इसके बाद जब हाल के महीनों में बेमौसम लगातार अंतराल पर बारिश ने टाल क्षेत्र में खासकर मसुर की फसल लील ली तो मुआवजा धनहर खेतों की फसल के हिसाब से मिलने पर किसानों में भारी नाराजगी है।
प्रखंड में तेलमर और सिरसी टाल मसुर की उपज के लिये नालंदा व पटना में जाना जाता है। वरुणतर गांव के वृंद सिंह ने बताया कि धोबा नदी में अचानक आये पानी से टाल क्षेत्र में 80 से 90 फीसदी मसुर की फसल बर्बाद हो गई। स्थानीय अफसरों ने भी स्थल मुआयना करके इसकी पुष्टि की थी। पर, उनके चार एकड़ से अधिक रकवे में फसल नुकसान का मुआवजा मात्र 55 सौ रुपये मिला है। जो कि नुकसान के हिसाब से करीब पचास हजार होना चाहिए।
इसी तरह की शिकायत तेलमर व सिरसी टाल के किसान ब्रजकिशोर सिंह, रामबाबू सिंह, सुधीर सिंह समेत कई किसानों की है। वृंद सिंह ने बताया कि एक हजार बीघा रकवा तो सिर्फ वरुणतर का है, जिसमें नुकसान हुआ है।

:: क्या कहते हैं अधिकारी

प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामदेव राम ने कहा कि टाल क्षेत्र में अवस्थित अपने खेतों का जिक्र संबंधित किसानों ने अपने आवासीय जोत में जोड़कर कर दिया था। इस वजह से मुल्यांकन में उन्हें मुआवजा कम मिला। उनसे टाल क्षेत्र का जिक्र करते दोबारा आवेदन देने को कहा गया है। इसके बाद मुआवजा का सही आकलन करके भुगतान होगा।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद