Wed. Apr 14th, 2021

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नालंदा: हरनौत में लगाए जाएंगे अठाईस हजार पौधे, मनरेगा से पूरा होगा सामाजिक वानिकी और बागवानी का लक्ष्य

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हरनौत में लगेंगे 28 हजार पौधे

* मनरेगा(MGNREGA) से सामाजिक वानिकी व बागवानी के लक्ष्य तय
* हरा-भरा होगा हरनौत
* वंचित वर्ग के आर्थिक उत्थान (economic uplift )में मिलेगी मदद

नालंदा (बिहार)हरनौत: पर्यावरण संतुलन (balance of environment )साधने के साथ अब आर्थिक रुप से पिछड़े तबकों, वृद्ध, विकलांग और विधवा महिलाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम मनरेगा से एक साथ होगा। इसके लिये प्रखंड में मनरेगा से 28 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य इस सत्र में रखा गया है।
कार्यक्रम पदाधिकारी शिवनारायण लाल ने बताया कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की वजह से किसान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोग परेशान हैं। क्योंकि आबादी के अनुपात में हरित क्षेत्र का आंकड़ा लगातार घटता जा रहा है। लोग असमय गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप बढ़ गया है।
लक्ष्य से सिर्फ हरियाली ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि इसके काम में वंचित वर्गों को प्राथमिकता देकर उनका आर्थिक पिछड़ापन दूर करने की भी योजना है।
उन्होंने बताया कि पौधरोपण( plantation ) दो रुपों में होगा। पहला सामाजिक वानिकी(social forestry ) और दूसरा बागवानी है। सामाजिक वानिकी योजना से सार्वजनिक स्थानों पर पौधारोपण किया जाना है। इस कार्य में आर्थिक रुप से कमजोर परिवार के सदस्य, दलित-महादलित, वृद्ध, विकलांग व विधवा महिला को प्राथमिकता दी जानी है। सार्वजनिक स्थानों पर इमारती पौधे प्राथमिकता से लगेंगे। क्योंकि फलदार पौधों को फल देने योग्य होने पर अक्सर बदमाशों के द्वारा नुकसान पहुंचाने या नष्ट करने की बात सामने आई है।
जबकि, बागवानी योजना से निजी जमीन पर पौधारोपण होना है। इसमें साठ फीसदी फलदार व चालीस फीसदी इमारती पौधे के अनुपात से पौधे लगेंगे। निजी जमीन पर पौधारोपण कार्य को प्राथमिकता दी जानी है। इसकी वजह है कि सार्वजनिक स्थानों पर पौधों का नुकसान अधिक होता है। जबकि, निजी स्थान पर पौधों की देखरेख सही से होती है। पौधा बड़ा होने पर फल देता है। इससे व्यवसायिक लाभ भी मिलता है।

:पांच वर्ष तक रखरखाव जरुरी

पीओ लाल ने बताया कि पौधारोपण से पांच वर्ष तक उसकी देखरेख का खर्च मनरेगा से की जाती है। प्रति युनिट पटवन के लिये चापाकल का भी प्रावधान है। इसका खर्च वेंडर के माध्यम से दिया जाता है।
इस दौरान पेड़ की संख्या भी बराबर होनी चाहिए। अन्यथा पेड़ की संख्या के अनुसार ही राशि देय होगी।

: तीन एफ से होगा जनकल्याण

मनरेगा के कनीय अभियंता लाल बहादुर शास्त्री ने बताया कि पेड़ से मिलने वाले तीन एफ जनकल्याण का काम करेंगे। पहले एफ से फूड यानि फल के रुप में भोजन मिलता है। दूसरे एफ से फॉड्डर(F’s found) यानि चारा जो पशुओं के लिये उपयोगी होगा। तीसरे एफ से फ्युल यानि जलावन के रुप में ईंधन मिलेगा।
इसके साथ सार्वजनिक स्थानो पर नियुक्त वन पोषक को मनरेगा से निर्धारित मजदूरी मिलेगी। यह लाभ निजी जमीन पर पौधरोपण में भी मिलेगा। जबकि पेड़ों पर तो जमीन धारक का मालिकाना हक भी होगा।

: खेत की मेड़ पर लगायें इमारती पौधे

शास्त्री ने बताया कि निजी अथवा सार्वजनिक जमीन पर युनिट के हिसाब से पौधारोपण की योजना है। एक युनिट में दो सौ पौधे होंगे। निजी जमीन पर बागवानी में साठ फीसदी फलदार पौधे होंगे। इन्हें कम से कम आठ-आठ फीट की दूरी पर लगाना है।
इसमें चालीस फीसदी इमारती पौधों को खेतों की मेड़ पर घेराबंदी के रुप में लगाना उपयोगी होगा। इसे किसानी भाषा में गेड़ाबंदी भी कहते हैं। पईन के अगल-बगल की जमीन होने पर यह गेड़ाबंदी खेत की फसल को डूबने से भी बचाती है। साथ ही अल्पवृष्टि में वर्षा आदि के पानी को खेत में रोकने में भी मदद करता है।
खेत की गेड़ाबंदी से और फायदा यह है कि इससे टिड्डे अथवा कीट पेड़ के पत्तों की ओर आकर्षित होते हैं। वे पत्तों को खाते हैं। इससे खेत की फसल में उनका उतरना कम होता है और फसल को नुकसान कम जाता है। पंजाब में इस तरह की खेती काफी प्रचलित है।
इसके अलावा दोपहर के बाद जब सुर्य पश्चिम दिशा में क्षैतिज होता है। उस समय उससे नुकसानदेह अल्ट्रावॉयलट किरणें तेज निकलती हैं। ये किरणें फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। खेत की मेढ़ पर लगे पेड़ उन किरणों को भी राेकने का काम करते हैं।

    रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद