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नालंदा : पंचाने नदी पर पुल के लिए ग्रामीणों ने सीएम से लगाई गुहार, नदी में पानी आ जाने से छ महीने झेलनी पड़ती है परेशानी

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पंचाने पर पुल के लिए सीएम को लिखा पत्र

* नदी में पानी आने से छह माह तक रास्ता हो जाता है बंद
* गंगटा गांव से मुख्य सड़क तक आने के लिए चार किमी का तय करते हैं सफर
* होती है परेशानी

नालंदा (बिहार) : हरनौत प्रखंड (Harnaut Block) के गंगटा गांव (Gangta Village) की तेरह सौ आबादी एक नदी पुल (Nadi pool)  के अभाव में साल के छह महीने खेती से लेकर गृहस्थी तक की तमाम परेशानियों का सामना करने को विवश है। चिकित्सा, शिक्षा व व्यवसाय के कार्यवश प्रखंड अथवा जिला मुख्यालय जाना पड़े तो ग्रामीण हरिहरपुर अथवा पोआरी तक करीब चार किमी पैदल दूरी तय करने पर मुख्य सड़क तक पहुँच पाते हैं। इससे नर्चवार खंधे में अपने खेतों तक पहुंचने में भी काफी जहमत उन्हें उठानी पड़ती है।
ग्रामीण बताते हैं कि बिरमपुर के निकट एनएच30ए से मोबारकपुर तक मुख्यमंत्री संपर्क योजना से सड़क बनी है। इससे साल के छह सूखे महीनों में बांस के बने चचरी पुल से नदी पार कर इस सड़क का लाभ लेते हैं।
पर, बाकी के छह महीने (6 Month) नदी में पानी आने पर चचरी पुल पार करना भी जोखिम का काम (Jokhim ka kam) होता है। इससे हरनौत बाजार पहुंचने अथवा नर्चवार खंधा में कृषि कार्य को जाने के लिए करीब चार किमी की दूरी तय कर मुख्य सड़क पर आ पाते हैं। अगर वहां नदी पुल बना दिया जाय तो गंगटा गांव की मुख्यालय से दूरी कमेगी ही। साथ ही गांव तक वाहनों का आवागमन संभव होगा। लोगों को अपनी उपज बाजार घर तक लाने व बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी। इससे महिला व बच्चों की परेशानी (Trouble for women and children) भी समझी जा सकती है।
इसके लिए दर्जनों की संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम से भेजा जा रहा है। इसके लिए जन जागृति मोर्चा के संगठन मंत्री चंद्रउदय सिंह ने समस्या को लेकर ग्रामीणों की आवाज उठाई है।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद