Wed. Apr 14th, 2021

Real4news

Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी – Real4news.com

नालंदा : अतिक्रमण से कृषि योग्य जमीन में हुआ जलजमाव ..बांस की चाली का है सहारा

1 min read

नालंदा (बिहार) हरनौत : एक समय हरनौत बाजार से पानी का निकास नियामतपुर से रेल पुल होते चेरन के निकट पईन में होता था। एनएच30ए के बगल से होते पईन से पानी पुरब के दर्जनों गांवों के सैंकड़ों एकड़ कृषि जोत तक पहुंचता था। आज इस क्षेत्र में रेल कोच फैक्ट्री, ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग वर्कशॉप व ग्रिड और सबस्टेशन बनने से आबादी का फैलाव भी हुआ है। इसी क्रम में मकान बनाने की होड़ में लोगों ने पईन में मिट्टी भरकर निर्माण सामग्री आदि लाने-ले जाने का रास्ता बना लिया। नतीजतन निकास के अभाव में पानी सीमित क्षेत्र में फैलना शुरु हो गया है। आलम यह है कि नियामतपुर टोला व स्टेशन परिसर के निकट बसे परिवारों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
इस वजह से विजय सिंह ने अपने खर्चे से घर से रोड पर तक आने के लिये बांस की चाली से रास्ता बनवाया है। क्योंकि निकास का स्थायी रास्ता नहीं है। खेत के किनारे जलजमाव में डूबे हैं। इससे जहरीले जीवों के भी घर में घुसने का भय रहता है।
गांव के सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि पईन के अगल-बगल घर बनवाने वालों ने पईन में एक ह्युम पाइप डलवा कर मिट्टी भरवाई होती तो जलजमाव नहीं होता। इससे नियामतपुर, स्टेशन कॉलोनी, गांधी टोला, पंचशील नगर व पटेल नगर तक जलजमाव से गंदगी की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

:: स्टेडियम का निर्माण भी प्रभावित

हरनौत हाईस्कूल के मैंदान में स्टेडियम का काम निर्माणाधीन है। जलजमाव से निर्माण कार्य में व्यवधान हो रहा है।
यही नहीं, बल्कि अधूरे निर्माण से अगल-बगल में रहने वाली आबादी के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। खासकर बच्चों की विशेष निगरानी रखनी पड़ती है।
यही नहीं, अक्सर कृषि जोत में जलजमाव होने से नियामतपुर के किसान परेशान होकर गांव के पास का निकास बंद कर देते हैं। इससे उनके खेत तो बच जाते हैं। पर, बाजार के मोहल्ले जलजमाव से त्राहिमाम की स्थिति में आ जाते हैं। इसके चलते अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।

:: क्या कहते हैं अधिकारी

सीओ अखिलेश चौधरी ने कहा कि यह गंभीर समस्या है। इससे अक्सर विधि-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
मामले की जांच कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद