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नालंदा : विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर महिलाओं को किया गया जागरूक, एक जरूरी और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया बताया

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-माहवारी : एक प्राकृतिक व जरुरी शारीरिक प्रक्रिया

* इसके बिना संकट में होगा मानव जाति का अस्तित्व
* विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर हरनौत व चंडी में जागरुक की गईं महिलायें

नालंदा (बिहार) हरनौत : (Harnaut) ‘शर्म नहीं सम्मान है, औरत की पहचान है’, आदि नारों के साथ विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस (Cleanliness day) पर हरनौत व चंडी प्रखंड के कई गांवों में जागरुकता कार्यक्रम किये गये। इसमें हरनौत के लोहरा व चंडी के बढ़ौना में महिलाओं ने हथेली पर रेड डॉट(लाल बिंदी) बनाकर महिला सशक्तिकरण के नारों से आवाज बुलंद की।
सेंटर फॉर कैटेलाईजिंग चेंज (Tur for catalysing change) व नेहा ग्रामीण महिला विकास समिति के द्वारा चलाई जा रही चैंपियन परियोजना में दोनों प्रखंडों की महिला पंचायत प्रतिनिधि जुड़ी हैं। परियोजना समन्वयक चंदन सिंह ने कहा कि जागरुकता कार्यक्रम में सामाजिक दूरी रखने के साथ महिलाओं को अपना पक्ष रखने की पूरी छूट दी गई।
इसमें वार्ड सदस्यों ने कहा कि माहवारी को लेकर आज भी शिक्षित होने के बावजूद महिला व किशोरियों में अपराध जैसा बोध होता है। इसके पीछे माहवारी के दौरान उन्हें घर में अलग-थलग करने की परंपरा जो पहले से चली आ रही है। जबकि, सर्वविदित है कि यह महिलाओं में प्राकृतिक व जरुरी शारीरिक प्रक्रिया है। अगर माहवारी नहीं हो तो मानव अस्तित्व ही संकट में पड़ जायेगा।
डिहरीगढ़ की सुनीता देवी ने कहा कि माहवारी के संबंध में शर्म और झिझक के चलते खासकर किशोर उम्र में लड़कियां लापरवाह होती हैं। उनके अभिभावक भी इस संबंध में उनसे खुलकर बात करने में हिचकते हैं, जिसका सीधा असर उसके वैवाहिक जीवन पर पड़ सकता है।
बढ़ौना की रिंकू देवी ने कहा कि माहवारी के दौरान हमेशा सेनेटरी पैड (Sanitary pads) अथवा साफ सूती कपड़े का व्यवहार करें।

रिपोर्ट : गौरी शंकर प्रसाद