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पटना : समाजसेवी रेयाज़ आलम ने जताई उम्मीद.. प्रवासी मजदूर अपने हुनर से बदलेगें प्रदेश के गांवों की तस्वीर

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पटना : प्रसिद्ध समाजसेवी और “नई उम्मीद नया संकल्प संस्था” के प्रबंध निदेशक रेयाज़ आलम ने कहा है की लौट रहे प्रवासी मजदूर अपने हुनर से प्रदेश के गांवों की तस्वीर बदल सकते हैं यदि सरकार संवेदनशील हो। खेती और गैर खेती पेशागत जीवन में बदलाव आयेगा, निर्माण श्रमिकों अब राजमिस्त्रियों का काम करेंगे। प्लम्बिंग, मोबाइल मरम्मती , बिजली मरम्मती , दर्जी, नाई सैलून आदि अनेक तरह के शहरी हुनर से लैस ये प्रवासी हुनरमंद गांवों की तस्वीर बदल देने के लिए काफ़ी हैं। युवा पीढ़ी शहर से गांव में आकर जाति और धर्म की संकीर्णता से ऊपर उठकर सामाजिक ताना-बाना भी बदलेंगे। श्री आलम ने कहा कि समाज समावेशी होगा, घरेलू कामकाजी महिलाओं को भी नकदी रोजगार मिलेगा और स्वरोजगार के हुनर भी सामने आएंगे जरूरत इस बात की है कि सरकारी खजाने से बैंकों से उनको सहायता राशि दी जाए। केंद्र और राज्य सरकारों को दूर दर्शितापूर्ण योजना बनाकर अमल करना चाहिए। जब मजदूर लौट रहे हैं तो सिर्फ कोरोना वायरस से निपटने का ही प्रोफाइल नहीं, उन मजदूरों की पेशागत हुनर का भी प्रोफाईल बनाया जाना चाहिए। बिहार सरकार को अपने संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन को यह निर्देश देकर कार्य योजना विकसित करनी चाहिए। सरकार को यह सोचना चाहिए कि अभी आनेवाले प्रवासी मजदूरों का जल्दी जाना भी मुश्किल होगा। बिहार में तो ये प्रवासी मजदूर चुनाव के बाद ही जाने वाले हैं। वह भी तब जब स्थिति सामान्य हो जाए।
संकट संभलने का भी अवसर देता है। जहां से जागे वहीं सवेरा।यह अवसर है संभालने का। भूख से मरने को अभिशप्त यह गरीब समाज को हर हाल में कुछ देते ही हैं।उन्होंने सरकार से मांग की है कि मजदूरों के लिए संवेदनशील संगठन बाहर से आने वाले मजदूरों के हुनर का प्रोफाइल बनाकर उनके लिए पुनर्वास कार्य योजना तैयार करें।

रिपोर्ट : साकिब ज़िया