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निक्षय दिवस पर लोगों ने लिया टीबी को हराने का संकल्प

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– हर महीने के दूसरे सोमवार को मनाया जाएगा निक्षय दिवस
– हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी मिलेगा टीबी कार्यक्रम लाभ

वैशाली।  वर्तमान समय में टीबी के मरीजों को सजग और सतर्क रहने की जरुरत है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टिरिया(Tuberculosis bacteria) के कारण होती है। इस बीमारी का प्रभाव सबसे अधिका फेफड़ों पर होता है। इसके अलावा यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी और हड्डी (Brain, Uterus, Mouth, Liver, Kidney and Bone) में भी हो सकती है। यह बीमारी मरीज के खांसने या छींकने से फैलती है। इसलिए बेहतर है कि हम इस बीमारी से बचाव के बारे में जाने ताकि यह रोग किसी अन्य में न फैले। ये बातें निक्षय दिवस के अवसर पर सोमवार को संक्रमण रोग पदाधिकारी डॉ शिव कुमार रावत बोल रहे थे। ज्ञात हो कि राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) की ओर से सभी यक्ष्मा पदाधिकारियों से एक पत्र जारी कर निर्देश दिया गया था कि प्रत्येक महीने के दूसरे सोमवार को निक्षय दिवस के रुप में मनाया जाय । इस अवसर पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी से बचाव तथा जानकारी संबंधित कार्यक्रम कराया जाए ताकि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को समाज में मात दी जा सके।

हर स्वास्थ्य केंद्र पर मनाया गया निक्षय दिवस

निक्षय दिवस के मौके पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पेशेंट प्रोवाइडर्स की मिटिंग एवं सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें टीबी चैंपियन के द्वारा संभावित टीबी मरीजों से संपर्क कर उन्हें टीबी की संपूर्ण जानकारी तथा समुदाय के बीचा जाकर टीबी के कारण,लक्षण और उपचार पर बातें की। वहीं स्वास्थ्य केंद्रों पर नुक्कड़ नाटक तथा, बैनर, प्रदर्शनी, माईकिंग जैसी गतिविधियों से निक्षय दिवस को मनाया गया। हरेक ग्राम सभा में टीबी जागरुकता संबंधी संदेश का लेखन भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से अब हर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर भी टीबी कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों का लाभ लिया जा सकेगा। अभी जिले में टीबी के लगभग 1245 मरीज ईलाजरत हैं।
निक्षय योजना के तहत मिलते हैं 500 रुपये
टीबी के मरीजों को उचित खुराक एवं पोषण देने के उद्येश्य से केंद्र सरकार की तरफ से निक्षय पोषण योजना चलाई गई है। जिसमें टीबी के मरीजों को उचित पोषण के लिए 500 रुपये प्रत्येक महीने दिए जाते हैं। यह राशि लाभार्थी के खाते में सीधे पहुंचती है। सरकार की मंशा है कि टीबी से देश को 2025 तक उन्मुक्त करा दिया जाय।

जिले में एमडीआर के लिए मौजूद है बीडाक्विलिन की दवा

जिले में अब एमडीआर मरीजों के लिए रामबाण दवा बीडाक्विलिन की दवा भी उपलब्ध है। पहले यह दवा सिर्फ नोडल डीआरटीबी सेंटर और आइजीआइएमएस में उपलब्ध थी। मालूम हो कि इस दवा की कीमत लाखों में है और सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही यह दवा उपलब्ध है। जिले में यह दवा सबसे पहले भगवानपुर तथा रजौली के मरीज को दिया गया है। इस दवा के इस्तेमाल के समय मरीजों के स्वास्थ्य का पर्यपेक्षण किया जाता है।

टीबी के लक्षण 

भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।

* बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।

* हलका बुखार रहना, हरारत रहना।

* खांसी आती रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।

* गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।

* गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।

* महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।

* पेट की टी.बी. में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।

* टी.बी. न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।