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समस्तीपुर : कोरोना असर..रीति. रिवाजों से भी करना पड़ रहा समझौता. बारातियों को मास्क और सेनिटाइजेशन के बाद मिला प्रवेश

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समस्तिपुर : आमतौर पर परिवर्तन का विरोधी समझा जाने वाला मुस्लिम समाज भी कोरोना वायरस (Corona virus) के इस संक्रमण (Infection) काल में खुद को बदल रहा है। वो अपनी रीति – रिवाजों से समझौता कर अन्य लोगों के लिए नजीर पेश कर रहा है। इसकी बानगी जिले के चकनूर गांव में एक शादी समारोह में देखने को मिली। गांव में हुई एक शादी में बारातियों का इत्र और फूल मालाओं से स्वागत (welcome) के बजाए हैंड सेनेटाइजर (Sanitizer)और मास्क देकर उनका स्वागत किया गया।

प्रवेश द्वार पर ही बारातियों के हाथ सेनेटाइज कर उन्हें मास्क पहनाया गया। यहां तक कि बारात के नाम पर सिर्फ 25 लोगों को बुलाया गया था। बारातियों के अलावा सरातियों को भी मास्क दिया गया और सभी से सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। खास बात यह है कि आम धारणा के विपरित यहां मांसाहार के बजाए बारात सहित सभी अतिथियों को भी शाकाहारी भोजन परोसा गया। गांव के ही “नई उम्मीद नया संकल्प फाउंडेशन” के अध्यक्ष मो० शमशाद उर्फ पप्पू ने बताया कि मुस्लिम समाज में भी अब जागरुकता आ रहा है। वह भी नई सोच के साथ बाकी समाज के साथ कदमताल कर आगे बढ़ रहा है। शमशाद ने बताया कि गांव के मोहम्मद बहाउददिन शेख की पुत्री सुमैइया की शादी लॉकडाउन (Wedding lockdown) के पहले ही महेश पट्टी निवासी मसूद अहमद के पुत्र अब्दुल समद से तय हुई थी। लॉक डाउन के कारण तीन बार शादी की तारीख टाली जा चुकी थी, लेकिन वर पक्ष ने खुद पहल करते हुए सादे समारोह में शादी करने को कन्या पक्ष को मना लिया। लड़की के पिता मो० बहाउद्दीन शेख ने बताया कि लड़का के शासकीय सेवा में होने के बावूजद भी वर पक्ष ने दहेज में उनसे किसी सामान और नकदी की मांग नहीं रखी थी। दहेज मुक्त इस शादी की समाज के सभी लोगों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। समारोह में वर – वधू को आशीर्वाद देने जदयू सांसद रामनाथ ठाकुर, सांसद प्रतिनिधि प्रोफेसर मो० आबाद, औषधि निरक्षक आदिल हसन तारीक़, सहित समाज के कई गणमान्य लोग पहुंचे थे।

रिपोर्ट : साकिब ज़िया