Sun. Apr 11th, 2021

Real4news

Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी – Real4news.com

सीतामढ़ी : समरेंद्र अब कररहे हैं कोरोना पीड़ितों की सेवा..सिविल डिफेंस से जुड़ करते थे देश सेवा

2 min read

कभी करते थे देश की सेवा, अब कर रहे हैं कोरोना पीड़ितों की देखभाल

– सेवा से पूर्व सिविल डिफेंस से जुड़े थे समरेंद्र
– हिचक मिटाने के लिए कोरोना केयर सेंटर में किया संक्रमितों का रुम साफ
– 18 से 19 घंटे देते हैं सेवा

– एक महीने से नहीं गये हैं घर

सीतामढ़ी 04 जून : जब एक तरफ पूरे देश में आम आदमी कोरोना (Corona) के भय से अपने घरों में बंद हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी कर्तव्यनिष्ठ लोग हैं जिनका कर्ज न तो देश और न ही कोई देशवासी उतार सकता है। हर क्षण अपने कर्म से अपने को योद्धा साबित कर रहे हैं। ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठों में शामिल हैं सीतामढ़ी (Sitamarhi) अस्पताल में जिला सामुदायिक प्रबंधक समरेन्द्र नारायण वर्मा। इन्होंने अवसर को सेवा में बदल दिया है। परिवार से दूरी हो या संक्रमण का खतरा इन्हें किसी की परवाह नहीं है। वह लगातार कोरोना केयर सेंटर (Care center) अपनी सेवा दे रहे हैं एवं विगत 1 महीने से इस कारण घर भी नहीं जा सके हैं।

समरेन्द्र कहते हैं, जब भी मौका मिला है उन्होंने अपने पूरे मन से सेवा की है। इस सेवा से पहले भी वह सिविल डिफेंस से जुड़े थे। बहुत सारे प्राकृतिक आपदाओं में उन्होंने काम किया। इस वक्त उन्हें कोरोना केयर सेंटर का प्रभार दिया गया है। जहां संक्रमितों का इलाज होता है। वह जिले के जिलाधिकारी, सिविल सर्जन और नोडल पदाधिकारी को इस सेंटर की जिम्मेदारी देने पर उनका आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया देश के दुश्मनों से लड़ने में जो उन्हें खुशी महसूस होती थी। कुछ ऐसी ही खुशी कोरोना केयर सेंटर में लोगों की सेवा कर उन्हें होती है।

-ख़ुद सफाई कर लोगों के मन से डर को भगाया:

समरेंद्र बताते हैं, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से सुझाव लिए। एक बेहतरीन डॉक्टरों की टीम बनायी। संक्रमित भर्ती होने लगे। यहां तक तो ठीका था। पर यह इतना आसान नहीं था। लोगों के मन में कोरोना के प्रति खौफ था। लोग सफाई और खाना पहुंचाने से भी डरते थे। उनके सामने यह बड़ी दुविधा थी। पर लोगों के मन से डर निकालने का एक ही तरीका था। उन्होंने प्रभारी के पद को किनारे रखा और सफाई करने में जुट गया। खाना मैं पहुचाने लगा। उनके कचरे को जलाता। यह देख लोगों के मन से भय निकलने लगा। यह समस्या तो हल हो गयी। अब जो समस्या थी वह इससे भी बड़ी थी। आखिर संक्रमितों को क्या दिया जाय कि उनका इम्यून सिस्टम अच्छा हो और वे कोरोना को हरा सकें। इसके लिए भी उन्होंने एक स्ट्रेटजी तैयार की और यह तय किया गया कि संतुलित आहर खाने का समय निर्धारण बिल्कुल सटीक हो। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी होगा। नतीजतन तेजी से संक्रमितों की रिकवरी हो रही है। वह मरीजों को खुला आसमान भी देते हैं ताकि वे मानसिक रुप से भी स्वस्थ्य (Health) रह सकें।

उन्होंने बताया सभी ने मिल कर ईद त्यौहार को भी मनाया। अब सभी एक परिवार की तरह ही रहते हैं। यहां ड्यूटी में लगे डॉक्टर का योगदान भी कहीं से भी उनसे कम नहीं है।

-एक महीने से नहीं गये घर :

समरेन्द्र कहते हैं बिना परिवार के सहयोग के आप कुछ नहीं कर सकते। उनका बेटा छह साल का है, जिसे उनके साथ सोने की आदत है। उनकी पत्नी को माइग्रेन है एवं वह खुद अस्थमा से पीड़ित हैं। वह कहते हैं, दिक्कत तो है, पर यह समय अपने लिए नहीं है। मेरे इस काम में मेरी पत्नी भी मेरा सहयोग करती है। मेरे यहां रहते उसे माइग्रेन का सर दर्द शुरु हो गया था, पर उसने एक कॉल तक नहीं किया। जब यह बात मुझे पता लगी तो उसने कहा कि इससे आपका काम में ध्यान नहीं लगता। वीडियो कॉल (video call) से ही संतोष कर लेता हूं। दो बार मेरी कोरोना जांच हो चुकी है जिसमें रिपोर्ट निगेटिव (Report negative) आया है।

-18 से 19 घंटे बिताते हैं केंद्र पर :

कोरोना केयर सेन्टर पर समरेंद्र 18 से 19 घण्टे का समय बिताते हैं। सेन्टर में भर्ती लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसलिए वह अधिकतम समय केंद्र पर ही रहते हैं। प्रतिदिन पूरे सेंटर को तीन बार डिस्इंफेक्ट (Disinfect) भी करते हैं। साथ ही उपयोगिता के आधार पर सामानों की पूर्ति भी कराते हैं। आज वह इस केंद्र की देखभाल एक अभिवावक की तरह कर रहे हैं।

-अपने स्तर से भी संक्रमितों की मदद:

“मैं थोड़ा भावूक इंसान हूं। मेरे यहां एक 14 वर्ष की संक्रमित भर्ती हुई थी। जिसके पिता की मौत हो चुकी थी और मां भी एनएमसीएच (NMCH) में भर्ती थी। पूरा परिवार कोरोना से पीड़ित था। उसके निजी जरुरतों के लिए मैं अपनी पत्नी से कहता तो वह तुरंत ही उसे पूरी कर देती। कुछ चीजें सरकारी स्तर से नहीं हो सकती। अक्सर ही मैं संक्रमितों के मोबाइल का रिचार्ज तथा कुछ निजी जरुरतों को भी पूरा कर देता हूं” समरेंद्र ने बताया।

सामाजिक द्वेष से बचें:

समरेंद्र कोरोना को लेकर हाल के दिनों में कुछ दंगे और किसी खास समुदाय पर जो आरोप लगाये गये उसके विषय में बात करते हुए कहते हैं, किसी समुदाय विशेष को टारगेट करना तर्कहीन हैं। यह अदृश्य दुश्मन किस पर वार करेगा। कोई नहीं जानता। यह समय साथ मिलकर देश को संबंल प्रदान करने का है। प्रत्येक भारतवासी कोरोना योद्धा है। फर्क सिर्फ इतना है वे घरों में हैं, हम बाहर।

रिपोर्ट : अमित कुमार