Thu. Apr 15th, 2021

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सामूहिक भागीदारी से टीबी का सफाया तय

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यक्ष्मा दिवस पर डॉ आशुतोष शरण को यक्ष्मा में बेहतरीन कार्य करने के लिए राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया गया

मोतिहारी: विश्व यक्ष्मा दिवस पर बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रंजीत रॉय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को पूरे विश्व में यक्ष्मा दिवस मनाया जाता है। यूनाइटेड नेशन में 2030 तक विश्व में यक्ष्मा उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन प्रधानमंत्री भारत सरकार ने 2025 तक ही यक्ष्मा मुक्त भारत का लक्ष्य रखा है। इसे साकार करने के लिए टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान चलाया जा रहा है। टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान पर कई कार्यक्रम आयोजित हुए । जिसमें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, कार्यपालक निदेशक, राज्य अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी व अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। चिकित्सक डॉ आशुतोष शरण को यक्ष्मा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। डॉ आशुतोष शरण ने पूर्वी चम्पारण जिले में लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने एवं बचाव के साथ टीबी पीड़ितों को बीमारी से मुक्त करने का काम किया है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रंजीत राय ने बताया कि जिला एवं प्रखंड स्तर पर प्रभात फेरी निकाली गई। इसके जरिए गांवों में टीबी पर जागरूकता फैलायी गयी ।

जिला में टीबी जांच व इलाज की बेहतर व्यवस्था
सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया टीबी का लक्षण दिखे तो जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र जाएं। पूर्वी चम्पारण में टीबी की जांच व इलाज की बेहतरीन व्यवस्था है। टीबी की बीमारी होने पर मरीजों को मुफ्त में दवा मिलती है। जिले के सभी प्रखंडों के सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था है। इसलिए अगर लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

जन आंदोलन से हारेगा टीबी
विश्व यक्ष्मा दिवस समारोह में जिला संचारी रोग पदाधिकारी (यक्ष्मा) डॉ रंजीत रॉय ने बताया कि टीबी संक्रमित मरीज़ों के इलाज में किसी भी तरह का कोई निजी खर्च वहन नहीं करना पड़ता है। दवा सहित अन्य जांच के लिए सरकारी स्तर पर सब कुछ उपलब्ध है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने एवं थूकने से फैलती है। दो सप्ताह या इससे अधिक समय तक खांसी, बलगम और बुखार, बलगम या थूक के साथ खून का आना, छाती में दर्द की शिकायत, भूख कम लगना, वजन में कमी आना आदि इसके लक्षण हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मियों व एसटीएस के माध्यम से खोजी अभियान में तेजी लाना बेहद ही जरूरी है। इससे टीबी के मरीजों की जल्द से जल्द पहचान की जा सकती है।

निक्षय पोषण के 500 रुपये देने का प्रावधान
टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने वाली निक्षय पोषण योजना बड़ी मददगार साबित हुई है। नए मरीज मिलने के बाद उन्हें 500 रुपये प्रति माह सरकारी सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह 500 रुपये पोषण युक्त भोजन के लिए दिया जा रहा है। टीबी मरीज को आठ महीने तक दवा चलती है। इस आठ महीने की अवधि तक प्रतिमाह पांच 500-500 रुपये दिए जाएंगे।

सामूहिक भागीदारी से टीबी का सफाया तय
डॉ रंजीत रॉय ने बताया टीबी एक संक्रामक बीमारी है। लेकिन सामूहिक रूप से भागीदारी होने के बाद इसे जड़ से मिटाया किया जा सकता है। टीबी संक्रमित होने की जानकारी मिलने के बाद किसी रोगी को घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, लक्षण दिखते ही नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए। क्योंकिं यह एक सामान्य सी बीमारी है और समय पर जाँच कराने से आसानी के साथ बीमारी से स्थाई निजात मिल सकती है।

रिपोर्ट : अमित कुमार