Wed. Oct 21st, 2020

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समाज सेवा की भावना ने कोरोना को हराने में मदद की: राजीव

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कोरोना पॉजिटिव हुए केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक राजीव रंजन कोरोना वारियर के रूप में कर रहे कार्य

शिवहर: कोरोना वायरस ने पूरे समाज को उसके असली योद्धाओं की पहचान करा दी है। उनमें स्वास्थ्यकर्मियों का नाम सबसे पहले आता है। इस काल के दौरान बहुत से ऐसे स्वास्थ्यकर्मी हैं जिन्हें कोरोना ने अपनी गिरफ्त में ले लिया, पर सकारात्मक सोच और कर्तव्यपरायणता ने उन्हें जल्द ही फिर से लोगों की सेवा के लिए प्रेरित कर दिया। ऐसे ही एक योद्धा हैं तरियानी पीएचसी में केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक राजीव रंजन। राजीव रंजन ने बताया कि जुलाई महीने में प्रवासी मजदूरों का आने का सिलसिला शुरू हुआ था। इस दौरान साथी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ वह भी जांच और पॉजिटिव मरीजों की खोज में लगे थे। इसी क्रम में जुलाई के प्रथम सप्ताह में उन्हें थकावट महसूस होने लगी। कमजोरी भी लगने लगी। जांच करवाने के बाद मालूम चला कि वह कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इसके बाद वह सुनरपुर स्थित आइसोलेशन सेंटर में भर्ती हो गए। फिर वहां से होम आइसोलेशन में चले गए। इस दौरान उन्होंने खुद में जोश भरा। मेहनत रंग लाई। इस तरह नकारात्मकता की दीवार में अपने जज्बे से उम्मीद की सुराख़ करने में उन्हें सफलता मिली. इसी हौसला का नतीजा था कि 15 दिन होम क्वारंटीन में रहकर फिर से वह मरीजों की सेवा में ड्यूटी पर लौट आए।

संक्रमण को ठीक करने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी

राजीव ने बताया स्वास्थ्य सेवा में रहने के कारण वह घर में भी काफी सतकर्ता बरतते थे। हाथ धोना एवं शारीरिक दूरी का पालन करना उनकी आदतों में शुमार था। जब उन्हें पता चला कि वह पॉजिटिव हैं, उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया। वह कहते हैं कि घर में रहकर संक्रमण को ठीक करने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना बहुत जरूरी था। इसलिए उन्होंने इसकी जरूरी दवाओं का भी सेवन किया। उन्होंने नेचुरोपैथी का सहारा लेते हुए दालचीनी एवं तुलसी का काढ़ा पीया। इसका असर हुआ कि वह चार से पांच दिन में कोरोना को मात देने में सफल हो सके।

फिर से जुट गये कार्य पर
राजीव रंजन ने बताया होम आइसोलेशन की अवधि पूरी कर वह अपने काम पर लौट गए। कोरोना को मात देने के बाद अब वह बेहतर तरीके से जान चुके थे कि उन्हें कैसे रहना है और दूसरों को कोरोना के बारे में क्या बताना है। उनका खुद का अनुभव लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने में बहुत सहायक भी साबित हुआ।

सकारात्मक रहें, भेद-भाव न करें

संक्रमण के दौरान राजीव ने खुद को सकारात्मक रखने के फायदों को महसूस किया था, जिससे उन्हें संक्रमण से उबरने में काफी मदद भी मिली थी। राजीव ने बताया संक्रमण के दौरान एक और बात उन्हें देखने को मिलती है कि कोरोना मरीजों के साथ लोग भेदभाव भी करने लगते हैं। यह बिल्कुल गलत है। कोरोना मरीजों के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि उन मरीजों में सकारात्मक ऊर्जा भरने की जरुरत है।

राजीव ने बताया कोरोना के संक्रमण काल मे लोग कोविड किन उचित व्यवहारों का पालन करें:

एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
• सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
• अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
• आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
• छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

रिपोर्ट : अमित कुमार