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कोरोना के प्रति सतर्क समाज में बदला अतिथि सत्कार का तरीका

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दूध वाली चाय की जगह नींबू की चाय या काढ़ा से अतिथि सत्कार का बढ़ने लगा चलन

– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में इसकी भूमिका के चलते बढ़ गई है इसकी महत्ता

सीतामढ़ी : कोरोना काल में समाज ने कई नई चीजों को स्वीकार किया है। रहन-सहन से लेकर खानपान तक। कोरोना संक्रमण से बचने के प्रति सतर्क समाज में ये बदलाव इस ओर इशारा करते हैं कि हर स्तर पर कोरोना को मात देने के लिए कमर कस ली गई है। बदलते सामाजिक व्यवहार में अब आवभगत के तरीके में भी आए बदलाव को महसूस किया जाने लगा है। अब जब आप किसी के घर मिलने जाते हैं तो अतिथि सत्कार में चाय की जगह लेमन टी (lemon tea )या काढ़ा ऑफर किया जाने लगा है। बहुत-से दुकानों-प्रतिष्ठानों में भी ग्राहकों के लिए ऐसी व्यवस्था दिख जाती है। समाज सुधार वाहिनी की जिलाध्यक्ष कामिनी झा बताती हैं कि आवभगत के तरीके में आए इस तरह के बदलाव बड़ा संदेश देते हैं। ये दर्शाते हैं कि हमारा समाज कोरोना को मात देने के लिए मानसिक रूप से भी कितनी तैयारी कर चुका है। उनका कहना है कि दरअसल नींबू की चाय हो या काढा, ये शुरू से प्रचलन में हैं। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में इसकी भूमिका के चलते दूध की चाय अब फीकी पड़ने लगी है। कई गृहणियों ने बताया कि अब घर आये अतिथि भी दूध की चाय की जगह नींबू की चाय या काढ़ा मांगते हैं।

आयुष मंत्रालय(Ministry of AYUSH) भी देता है काढ़े का प्रचलन बढ़ाने की सलाह :

हमारे देश में काढ़ा पीने का चलन प्रचीनकाल से ही है। देश के कई हिस्सों में कई तरह के काढ़े बनाए जाते हैं। किसी घर में अदरक और तुलसी का काढ़ा बनाया जाता है, तो वहीं कुछ घरों में तुलसी का काढ़ा बच्चों को दिया जाता है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने और इम्युनिटी (immunity) बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने लोगों को काढ़ा पीने की भी सलाह दी है। त्रिकूट चूर्ण का काढ़ा बनाकर परिवार के सदस्यों को आवश्यक रूप से पिलाने की बात कही है। बताया गया है कि इस चूर्ण को एक लीटर में केवल एक चम्मच ही मिलाएं। इसके साथ ही इसमें 5 तुलसी के पत्ते एवं एक चुटकी हल्दी डालकर उस समय तक उबालें जब तक कि यह काढ़ा आधा लीटर न हो जाए। इसके बाद 25 मिलीलीटर दिन में कम से कम 3 बार प्रत्येक सदस्यों को आवश्यक रूप से पिलाएं। यह का़ढ़ा लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इसके साथ ही यह काढ़ा कोरोना एवं अन्य रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।

संतुलित रहनी चाहिए काढ़े में सामग्रियों की मात्रा :

कोविड केयर के नोडल अधिकारी डॉ सुरेंद्र कुमार चौधरी के अनुसार कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अभी लोगों का काढ़ा पीने पर ज्यादा जोर रहता है। निश्चित रूप से काढ़ा लाभदायक है, लेकिन इसमें डालने वाले सामान अगर संतुलित मात्रा में नहीं होंगे तो यह पेट खराब कर देता है। इसलिए काढ़े में दालचीनी, हल्दी, तुलसी पत्ता आदि की मात्रा संतुलित रहनी चाहिए।

काढ़ा एक, फायदे अनेक :

सर्दी-जुकाम और गले में खराश से राहत दिलाने के लिए तुलसी का काढ़ा पीने की सलाह दी जाती है।
– तुलसी के पत्ते को पानी में उबालकर थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर काढ़ा बनाया जाता है। इस काढ़े को पीने से फ्लू रोग जल्दी ठीक हो सकता है।
– हार्ट के मरीजों को नियमित तौर पर तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने की सलाह दी जाती है। तुलसी का काढ़ा शरीर के कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) को नियंत्रित करने का काम करता है।
– अदरक में खून पतला करने का गुण पाया जाता है। नियमित तौर पर अदरक का काढ़ा पीने से ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं नहीं होती है।
– जिन लोगों को खांसी, बुखार और गले की खराश जैसी समस्याएं होती हैं उन्हें भी अदरक का काढ़ा पीने की सलाह दी जाती है।
– अदरक का काढ़ा उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद होता है, जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। रोजाना 2 चम्मच अदरक का काढ़ा पीने से पाचन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं।

रिपोर्ट : अमित कुमार