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कालाजार ठीक होने के बाद भी त्वचा प्रभावित होने का होता है खतरा

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-पूरी तरह से ठीक हो सकता है त्वचा का कालाजार, आर्थिक मदद भी करती है सरकार

-दवा का लगातार 12 सप्ताह तक सेवन से ठीक हो जाता है त्वचा का कालाजार

-इलाज के बाद मरीज़ को 4000 रुपये का आर्थिक अनुदान भी देती है सरकार

सीतामढ़ी 1 सितंबर : कालाजार ठीक होने के बाद भी त्वचा सम्बन्धी लीश्मेनियेसिस रोग होने की सम्भावना रहती है। (Even after Kala-azar is cured, there is a possibility of skin leishmaniasis disease.) इसे त्वचा का कालाजार (पीकेडीएल) भी कहा जाता है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर.के यादव ने बताया कि पीकेडीएल का ईलाज पूर्ण रूप से किया जा सकता है। (PKDL can be treated completely) इसके लिए लगातार 12 सप्ताह तक दवा का सेवन करना पड़ता है। ईलाज के बाद मरीज़ को 4000 रुपये का आर्थिक अनुदान भी सरकार द्वारा दिया जाता है। डॉ यादव ने बताया कि “घर घर कालाजार रोगियों की खोज ” कार्यक्रम का पर्यवेक्षण के दौरान उन्होंने नानपुर एवं पुपरी में आशा द्वारा घर-घर जाकर खोजे गए संभावित पीकेडीएल के मरीजों का स्वयं परीक्षण किया। पुपरी के जैतपुर गांव के एक रोगी में इसकी संपुष्टि भी की। डॉ यादव ने बताया कि जैतपुर के उक्त 55 वर्षीय मरीज को बचपन में भी कालाजार हुआ था। दो माह पूर्व भी कालाजार हुआ तो ईलाज किया गया था। विगत 15 दिनों से उसके पूरे बदन में चकत्ते निकलने लगे हैं और नाक पर गांठ निकल आई है, जो बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त मरीज़ में मैकुलर तथा नोड्युलर दोनों तरह के पीकेडीएल के लक्षण मौजूद हैं। उन्होंने भीबीडीएस दीपक कुमार को उक्त मरीज का ईलाज शुरू करने के लिए कह दिया है ।

क्या होता है पीकेडीएल :

पीकेडीएल यानि त्वचा का कालाजार एक ऐसी स्थिति है, जब लीशमैनिया डोनोवानी नामक परजीवी त्वचा कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें संक्रमित कर देता है और वहीं रहते हुए विकसित होकर त्वचा पर घाव के रूप में उभरने लगता है। इस स्थिति में कालाजार से ग्रसित कुछ रोगियों में इस बीमारी के ठीक होने के बाद त्वचा पर सफेद धब्बे या छोटी-छोटी गाँठें बन जाती हैं। त्वचा सम्बन्धी लीश्मेनियेसिस रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो मादा फ्लेबोटोमिन सैंडफ्लाइज प्रजाति की बालू मक्खी के काटने से फैलती है। बालू मक्खी कम रोशनी और नमी वाले स्थानों जैसे मिट्टी की दीवारों की दरारों, चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है। इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है।

जिले में कालाजार रोगियों का खोज अभियान जोरों पर :

जिले में कालाजार रोगियों का खोज अभियान जोरों पर है। 257 आशा एवं 107 आशा फैसिलिटेटर की टीम जिले के 16 प्रखंडों में इस मुहिम को सफल बनाने में लगी है। डॉ आरके यादव लगातार अभियान का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने सभी आशा को निर्देश दिया है कि अगर किसी परिवार में कोई 15 दिनों से अधिक समय से बुखार से पीड़ित है या शरीर में सिभुली जैसा दाग-धब्बा हो तो उसकी रिपोर्ट रजिस्टर में दर्ज निश्चित रूप दर्ज करना है। दो सप्ताह से जिस व्यक्ति को बुखार लग रहा है, उसे आशा रेफ़र कर उस व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए भेजगी। जांच के बाद अगर कालाजार रोग का लक्षण मिलता है तो सरकार की तरफ़ से मरीज को निःशुल्क दवा दी जायेगी।

रिपोर्ट : अमित कुमार