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वैशाली : मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की जरूरत पर सिविल सर्जन ने दिया जोर..आशा फैसिलेटर और पीएचसी पदाधिकारियों के साथ की बैठक

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वैशाली 12 मई : कोविड संक्रमण के कारण हुए लाॅकडाउन से सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य कैसे सुरक्षित और सुदृढ़ रहे इसके लिए हम सभी को एक कार्ययोजना पर काम करना होगा। यह बातें सदर अस्पताल में मंगलवार को आशा फैसिलिटेटर और पीएचसी पदाधिकारियों के साथ सिविल सर्जन डाॅ इंद्रदेव रंजन जूम एप के माध्यम से कह रहे थे। उन्होंने कहा कि लोक स्वास्थ्य से जुड़ी सारी मशीनरी कोविड -19 के प्रबंधन में व्यस्त है। वहीं संक्रमण के रोकथाम एवं चिकित्सकीय उपचारादि के साथ ही चिन्हित क्षेत्रों में सर्वे आदि कामों में भी स्वास्थ्यकर्मियों की कार्याधिकता के कारण लोड बढ़ा है। ऐसे मे मातृ स्वास्थ्य सेवा और नवजात शिशु देखभाल तथा गैर संचारी रोगों के उपचार की सुनिश्चितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए इन सेवाओं के सुदृढ़िकरण के लिए कुछ कदम उठाने की आवश्यकता हैं। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को एएनसी एवं संस्थागत प्रसव के लिए निरंतर उनका फाॅलोअप एवं एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था करना हमारी जिम्मेवारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर केंद्रवार केस का आंकड़ा दिया जाएगा। जिसमें आगामी तीन महीने में होने वाले प्रसव की तिथि अंकित हैं वह इन लोगों का फाॅलोअप करेगें और उनका मोबाइल नंबर और पता उनके घर जाकर एकत्र करेगीं। वहीं जब उनके प्रसव की तिथि एक सप्ताह बचेगी तब वह प्रतिदिन जाकर उनका फाॅलोअप करेगीं। वहीं एम्बुलेंस की व्यवस्था भी करेगीं। एम्बुलेंस की उपस्थिती संभव नहीं होने पर प्राइवेट वाहन को टेैग कराया जाय। जिसमें गर्भवती स्त्रियों को स्वस्थ्य संस्थानों मे लाने के लिए जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत 500 रुपये भी दिए जाएगें।

गर्भवती महिलाओं को एएनसी के दौरान आने जाने में परेशानी नहीं हो इसके लिए अस्पताल भ्रमण के दौरान ही एमसीपी कार्ड रखने का आदेश दिया जाए। अगर कोई महिला हाई रिस्क प्रेगनेंसी में हैं तो उनकी विशेष निगरानी की जाए। उन्हें एक्सपेक्टेड डेट के तीन दिन पहले ही अस्पताल लाया जाना सुनिश्चित किया जाय। वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाॅ अनिल कुमार ने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी पर टीकाकरण की शुरुआत होने से नवजात और बच्चों के प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होगा। जो उन्हें अन्य बीमारियों से मुक्त रखेगा। यह टीकाकरण नवजात मृत्यु दर को भी कम करने में सहायक होगा।

कोविड 19 पाॅजीटिव गर्भवती महिला को अलग कक्ष

अगर कोई महिला अपने गर्भावस्था के अंतिम काल में है और उसमें कोविड के कोई लक्षण हो, उसकी स्क्रीनिंग नहीं हो पायी हो या उसका कोई ट्रैवेल हिस्ट्री हो तो उसके लिए अस्पताल के अलग कमरे को चिन्हित कर एक लेवर टेबल एवं एक बेड तैयार रखा जाय। गर्भवती माताओं के प्रसव कार्य में कम से कम डाॅक्टर का उपयोग किया जाए एवं जब तक उक्त महिला का रिपोर्ट कोविड 19 निगेटिव नहीं आ जाता तक तक उस कक्ष का इस्तेमाल किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जाएगा। मौके पर सिविल सर्जन डाॅ इंद्रदेव रंजन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाॅ अनिल कुमारए जिला संसाधन ईकाई के डीटीएल सुमित कुमार तथा डीटीओ शिवानी सिंह मौजूद थी।

रिपोर्ट : अमित कुमार