नालंदा: अपने हक का अनाज मांगने बुजुर्ग और महिला पहुंचे प्रखंड कार्यालय ,पीडीएस दुकानदार पर मनमानी का लगाया आरोप
2 min readराशन की मांग को लेकर ब्लॉक पहुंचे बुजुर्ग व महिला
* पेट की भुख ने सताया तो अपना अधिकार याद आया
* जांच हुई तो खुलेगी राशन के बंदरबांट की पोल
नालंदा(Nalanda) (बिहार)हरनौत(Harnaut ): कोरोना वायरस(Corona virus) के फैलाव को लेकर देश में लॉकडाउन ( lockdown)है। इसका सबसे ज्यादा असर श्रमिक वर्ग पर पड़ा है। ऐसे में जब घर की जमा-पुंजी खत्म हुई तो उन्हें सरकारी स्तर से मिलने वाले राशन आदि की याद आई। किसी को कई वर्षों तो किसी को कई महीनों से जनवितरण का अनाज नहीं मिला है। डीलर के पास जाने पर उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया। किसी को राशन कार्ड नहीं तो किसी का नाम लिस्ट में नहीं होने की बात कह कर चलता कर दिया गया।
किसी जानकार ने इसकी टोह ली। बताया गया कि अब तो सब ऑनलाइन( online)
है। पीडीएस(PDS ) संबंधी वेबसाइट(website) पर सर्च करने पर साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि सभी का राशन कार्ड बना हुआ है। राशनकार्ड नंबर के आधार पर संबंधित डीलर के अनाज का उठाव करने की बात भी छानबीन में पता चली। पर, डीलर ने अनाज देने से साफ मना कर दिया। इससे प्रभावित किचनी गांव के विशुनदेव प्रसाद, कैलाश साव, धानो देवी, छोटी आमर की कृंता देवी, शोभा देवी, अनीता देवी, रामलगन यादव, राम श्रृंगार प्रसाद समेत कई प्रखंड कार्यालय में फरियाद लेकर पहुंचे हैं।
छोटी आमर की कृंता देवी ने बताया कि उनके घर में आठ लोग हैं। काम-धंधा बंद है। भोजन का खर्च जुटाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने दो वर्ष पहले ही राशन कार्ड के लिए आवेदन किया था। इसकी रसीद भी उनके पास है। जानकार ने मोबाइल से पता कर बताया कि राशनकार्ड (ration card )बना है। उसका नंबर भी बताया। नंबर के आधार पर अनाज के उठाव की बात भी कही। पर, डीलर के पास जाने पर दुत्कार कर भगा दिया, कहकर महिला बिलख पड़ती हैं।
इसी तरह शरीर से लाचार वृद्ध विशुनदेव प्रसाद भी किचनी से किसी तरह ब्लॉक(block) पहुंचे हैं। उन्हें भी डीलर ने ऐन-केन-प्रकारेण (an-ken-prakane)टकराकर राशन से वंचित कर दिया है।
ऐसे समय जब कोरोना महामारी से देश और दुनिया तबाह है। सरकार ने मिलने वाले राशन के अलावा रियायत पर नि: शुल्क राशन की व्यवस्था की है। फिर भी धरातल पर उसे संबंधित रसूख वाले लोग निजी लाभ का जरिया बनाकर रखे हैं।
जानकार बताते हैं कि अगर राशन वितरण की सही तरीके से जांच की गई तो इसमें कितनों की बंदरबांट निकलेगी, कहना मुश्किल है।
रिपोर्ट : गोरी शंकर